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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 01, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

11 गवाह, 60 से ज्यादा तारीखें...; पत्नी की हत्या कर सिर लेकर घूमने वाले पति को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

Published: Thu, 01 Aug 2024 09:17 AM (IST)

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में नौ अक्टूबर 2020 को अवैध संबंध होने की शंका पर पति ने अपनी पत्नी ...और पढ़ें

सत्र न्यायालय बांदा में फांसी की सजा होने के बाद कोर्ट से बाहर निकलता दोषी किन्नर यादव। वीडियाेग्रैब
सत्र न्यायालय बांदा में फांसी की सजा होने के बाद कोर्ट से बाहर निकलता दोषी किन्नर यादव। वीडियाेग्रैब

HighLights

  1. नौ अक्टूबर 2020 में हुई थी घटना, पौने चार साल बाद आया फैसला
  2. अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश किए, पांच जज बदले, 60 से ज्यादा तारीखें पड़ी
  3. मृत्युदंड के साथ 13 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया

जागरण संवाददाता, बांदा। अवैध संबंधों के शक में पत्नी का फरसे से सिर काटने के बाद उसका सिर पकड़कर पैदल थाने जाने वाले पति को जिला सत्र न्यायाधीश डा.बब्बू सारंग की अदालत ने दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। मृत्युदंड के साथ उस पर 13 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश किए थे।

उक्त प्रकरण में पांच जज बदले थे जब कि 60 से ज्यादा तारीखें पड़ी थीं। पौने चार साल बाद प्रकरण में अदालत ने फैसला सुनाया है।

अवैध संबंध के शक में की थी हत्या

वर्ष 2020 में नौ अक्टूबर को बिसंडा थाना क्षेत्र के ग्राम अमलोहरा के रहने वाले 39 वर्षीय किन्नर यादव ने पत्नी विमला के किसी दूसरे व्यक्ति के साथ अवैध संबंध हाेने की शंका पर कोतवाली बबेरू के कस्बा नेता नगर में उसकी धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी थी।

कथित प्रेमी पर भी उसने हमला किया था जिसमें उसने भागकर खुद को बचाया था। इसके बाद पत्नी का कटा सिर पकड़कर पति किन्नर कस्बे में पैदल घूमते हुए कोतवाली पहुंचा था। जहां उसने कहा था साहब इसे मैनें मार डाला। पुलिस व कस्बेवासी उसका यह रूप देखकर सन्न रह गए थे। बाद में दिवंगत पत्नी के पिता रामसरन यादव की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।

कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

विवेचना तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक जयश्याम शुक्ला ने की थी । विवेचक ने प्रभावी विवेचना करते हुए साक्ष्य संकलन कर 27 अक्टूबर 2020 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था । लोक अभियोजक विजय बहादुर सिंह व उमाशंकर सिंह की ओर से जिला सत्र न्यायालय में प्रभावी पैरवी की गई । जिला सत्र न्यायालय के न्यायाधीश ने हत्यारे पति को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। दोषी पर 13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

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