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    बहराइच में मक्के से मिल में बन रहा एथेनाल, बढ़ रही किसानों की आय

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 03:41 PM (IST)

    बहराइच में मक्का बोआई करने वाले किसानों की आय बढ़ रही है। जिसके चलते जिले में मक्का बोआई का क्षेत्रफल बढ़ता जा रहा है। किसानों से खरीदे गए मक्के की बि ...और पढ़ें

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    सांकेत‍िक तस्‍वीर।

    जागरण संवाददाता, बहराइच। जिले में मक्का बोआई करने वाले किसानों की आय बढ़ रही है। जिसके चलते जिले में मक्का बोआई का क्षेत्रफल बढ़ता जा रहा है। किसानों से खरीदे गए मक्के की बिक्री पारले मिल को किया जा रहा है। मिल में मक्के से एथेनाल का निर्माण किया जा रहा है। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है।


    कृषि बाहुल्य जिले में मोटे अनाज के रूप में किसान मक्के की बोआई करते हैं। पहले किसान आटा, चावल व भुट्टे के रूप में इसका उपयोग व बिक्री करते थे, लेकिन अब समय बदलने के साथ मक्के से एथेनाल का निर्माण भी किया जा रहा है। जिसके चलते किसान खेतों में काफी मात्रा में मक्के की बोआई शुरू कर दी है।

    जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूबेदार यादव ने बताया कि रबी सीजन में जिले में 25 हजार हेक्टेयर में मक्के की बोआई की गई थी। एक हेक्टेयर में 50 से 70 क्विंटल मक्के की पैदावार हुई थी। मक्का उत्पादन होने के बाद शासन के निर्देश पर पांच क्रय केंद्रों पर खरीद की गई थी। किसानों से खरीदी गई मक्के को पारले चीनीमिल परसेंडी में बिक्री कर दी गई। इस मक्के से एथेनाल का निर्माण मिल द्वारा किया जा रहा है।

    एथेनाल के उत्पादन होने पर इसे ईंधन, शराब, बीयर के निर्माण में उपयोग किया जा रहा है। साथ दवाएं व सेनेटाइजर के में प्रयोग किया जा रहा है। मोतीपुर इलाके के किसान राधेश्याम, सेमरहना निवासी राम ध्यान कुशवाहा, नैनिहा निवासी संजू गुप्ता ने बताया कि मक्का कम समय और कम लागत में उत्पादित हो रहा है। सरकार द्वारा खरीद करने से उन्हें अधिक मुनाफा मिल रहा है।

     

     

    जिले में वर्ष में तीन बार मक्के की बोआई किसान करते हैं। इनमें रबी सीजन, खरीफ और जायद शामिल है। जायद बोआई मसूर, सरसो व आलू की खोदाई के बाद की जाती है। चार से पांच माह में मक्का तैयार हो जाता है। मक्के को पारले चीनीमिल को व्यापारियों व विभागीय अधिकारियों द्वारा बिक्री किया जाता है।- डॉ. सूबेदार यादव, जिला कृषि अधिकारी