मानो कोई परिवार का सदस्य चला गया हो... हर आंख नम और दिल भारी, नानाखेड़ा के घरों में भाेजन करने वाली गाय की मौत
उझानी के नानाखेड़ा गांव में एक लाडली गाय की ठंड से मृत्यु हो गई। ग्रामीणों ने दो-तीन साल से गांव में रह रही इस शांत स्वभाव की गाय के निधन पर गहरा शोक ...और पढ़ें

गाय की अंतिम यात्रा।
संवाद सूत्र जागरण, कछला। उझानी विकास खंड क्षेत्र के ग्राम नानाखेड़ा में गांव की लाडली बन चुकी एक बुजुर्ग गाय की कड़ाके की ठंड के चलते मृत्यु हो गई। इस घटना से पूरे गांव में शोक व्याप्त रहा। ग्रामीणों के अनुसार यह गाय पिछले दो-तीन वर्षों से गांव में ही रह रही थी और रोजाना लगभग 19 घरों में जाकर खाना खाती थी।
उझानी क्षेत्र के गांव नानाखेड़ा में ग्रामीणों की लाडली बन चुकी थी गाय, मृत्यु पर शोक
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सैकड़ों घर होने के बावजूद गाय उन्हीं घरों में जाती थी, जहां उसे प्रेमपूर्वक रोटी, चावल, बिस्किट, पापड़ आदि खिलाया जाता था। गाय इतनी सीधी और शांत स्वभाव की थी कि गांव के बच्चे उसके आसपास खेलते रहते थे। हैरानी की बात यह रही कि उसने कभी किसी के खेत या दरवाजे पर जाकर भूसा या चारा नहीं खाया।
एक दिन पहले तक थी ठीक
ग्रामीणों का कहना है कि एक दिन पहले तक गाय पूरी तरह स्वस्थ थी और रोज की तरह गांव में घूमकर भोजन करके लौटी थी। उसके बैठने या लेटने के लिए कोई स्थायी इंतजाम नहीं किया जा सका। शायद इसी वजह से रविवार को उसकी ठंड लगने से मृत्यु हो गई। रविवार को पूरे विधि-विधान से उसकी शव यात्रा निकाली गई।
गड्ढा खुदवाकर उसका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया
बैंड-बाजे के साथ गाय को विमान में सजाकर कछला गंगा घाट ले जाया गया, जहां गड्ढा खुदवाकर उसका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया। इस भावुक दृश्य को लोगों ने मोबाइल में रिकार्ड कर इंटरनेट मीडिया पर भी प्रसारित किया गया। शव यात्रा में प्रमोद गुप्ता, दिनेश गुप्ता, संजय गुप्ता, गुड्डू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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