राम मंदिर में कैमरा लगा चश्मा पहनकर जा रहा था दर्शनार्थी, सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ा; एसपी ने की ये अपील
राम मंदिर परिसर में कैमरा लगा चश्मा पहनकर दर्शन करने जा रहे गुजरात के वडोदरा से आए श्रद्धालु जानी जयकुमार को सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ लिया। चश्मे के दोनों ओर नीले रंग के छोटे कैमरे लगे थे और बगल में एक बटन था जिसे ऑन करने पर चश्मे से ब्लू टूथ के माध्यम से फोटो खींची जा सकती थी और वीडियो भी बनाया जा सकता था।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर में कैमरा लगा चश्मा पहनकर दर्शन करने जा रहे गुजरात के वडोदरा से आए श्रद्धालु जानी जयकुमार को सोमवार को सुरक्षाकर्मियों ने मंदिर परिसर के बाहर पकड़ लिया। चश्मा उतरवाने के बाद उसे दर्शन के लिए भेजा गया।
एसपी सुरक्षा बलरामाचारी दुबे ने बताया कि अपराह्न तीन बजे जयकुमार को मंदिर के सिंह द्वार पर एसएसएफ के सिपाही अनुराग ने पकड़ा। जांच में पाया गया कि चश्मे के दोनों ओर नीले रंग के छोटे कैमरे लगे हैं और बगल में एक बटन है, जिसे ऑन करने पर चश्मे से ब्लू टूथ के माध्यम से फोटो खींची जा सकती है और वीडियो भी बनाया जा सकता है। जांच में चश्मे की कीमत लगभग 30 से 50 हजार रुपये के मध्य पाई गई है। एसपी सुरक्षा ने दर्शनार्थियों से अपील की है कि इस तरह का विशेष चश्मा लगा कर मंदिर में नहीं जाएं, अन्यथा कड़ी कार्रवाई होगी।
राम मंदिर के मुख्य शिखर का चुनौतीपूर्ण कार्य पूरा
बता दें राम मंदिर के निर्माणाधीन मुख्य शिखर की शिखर पेटी बांध कर अभियंताओं ने सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण कार्य पूरा कर लिया, अब इसके ऊपर 14वीं परत में गुलाबी पत्थरों को संयोजित किया जाने लगा है। साथ ही 15वीं लेयर के लिए शिलाएं क्रेन के माध्यम से ऊपर चढ़ायी जाने लगी हैं।
निर्माण में संलग्न कार्यदायी एजेंसियों के अभियंताओं का कहना है कि वैसे तो संपूर्ण मुख्य शिखर का कार्य चुनौतीपूर्ण है, पर शिखर पेटी सर्वाधिक महत्वपूर्ण रही। इसे 11 परत तक पत्थरों को तकनीकी रूप से संयोजित कर बांधा गया है। रामजन्मभूमि परिसर पर निर्मित राम मंदिर के मुख्य शिखर का निर्माण नवरात्र के प्रथम दिन एक अक्टूबर को शिलापूजन कर प्रारंभ हुआ था।
तबसे मुख्य कार्यदायी एजेंसी लार्सन एंड टुब्रो के निर्देशन में अनवरत निर्माण चल रहा है। इसमें सभी एजेंसियों के अभियंता जुटे हैं। सवा तीन महीने में मुख्य शिखर की 14 परत में पत्थर संयोजित किए जा चुके हैं। इसमें लगभग 34 हजार घन फीट पत्थरों का संयोजन कुल 29 लेयर में किया जाना है। इस कारण लगभग साढ़े तीन माह का समय और लगने की संभावना है।
एलएंडटी के परियोजना निदेशक विनोद कुमार मेहता ने बताया कि अब तक लगभग 18 हजार घन फीट पत्थर संयोजित किए जा चुके हैं। परिसर में चल रहे अन्य निर्माणों की प्रगति के बारे में उन्होंने बताया कि यात्री सुविधा केंद्र में निर्मित हो रहा गोस्वामी तुलसीदास जी का मंदिर पूर्ण हो गया है। गत दिनों इसका शिखर भी निर्मित कर लिया गया है। साथ ही परकोटे के बाहर बन रहे सप्तर्षियों के सात मंदिरों में से तीन का कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। अन्य चार मंदिरों का कार्य भी एक-डेढ़ माह में पूर्ण हो जाने की उम्मीद है।
रामजन्मभूमि परिसर का परकोटा और इसके मध्य बन रहे छह देवी-देवताओं के मंदिरों का निर्माण भी द्रुत गति से जारी है। राम मंदिर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में बन रहे शेषावतार लक्ष्मण जी के मंदिर निर्माण में लगभग छह माह लगेंगे। अभी इसमें तीन हजार घन फीट पत्थरों का कार्य हुआ है। इस मंदिर के निर्माण में लगभग 17 हजार घन फीट पत्थर प्रयुक्त होने हैं। वहीं राम मंदिर के प्रथम तल पर दरवाजे लग रहे हैं तो द्वितीय तल पर फर्श निर्माण का कार्य चल रहा है।
मार्च तक प्रारंभ होगी मूर्तियों की स्थापना
सप्तर्षियों के सभी सात मंदिरों का कार्य फरवरी के अंत तक पूर्ण होने की संभावना है। तुलसीदास मंदिर भी तैयार हो गया है। इस कारण माना जा रहा है कि मार्च के प्रथम सप्ताह तक इन मंदिरों में मूर्तियों की स्थापना का कार्य प्रारंभ हो जाएगा। परिसर में बन रहे सभी डेढ़ दर्जन मंदिरों और राम दरबार की मूर्तियों का निर्माण श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के निर्देशन में राजस्थान के जयपुर में चल रहा है। गत दिनों ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने निरीक्षण भी किया था।
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