अयोध्या में 12 करोड़ की लागत से आठ धार्मिक स्थलों का होगा सुंदरीकरण, शासन से मिली स्वीकृति
अयोध्या में नए साल में 12 करोड़ रुपये की लागत से आठ धार्मिक स्थलों का कायाकल्प होगा। तीर्थ विकास परिषद इन परियोजनाओं को मूर्त रूप देगा, जिसका उद्देश्य ...और पढ़ें

नए वर्ष में 12 करोड़ रुपये की लागत से आठ धार्मिक स्थलों का होगा कायाकल्प।
संवाद सूत्र, अयोध्या। जिले के आठ धार्मिक स्थलों का कायाकल्प नए वर्ष में होने जा रहा है। तीर्थ विकास परिषद इन परियोजनाओं को मूर्त रूप प्रदान करेगा। योजनाओं पर कुल 12 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। परिषद की प्रस्तावित नवीन परियोजनाओं में मिल्कीपुर के आस्तिकन, गहनाग बाबा मंदिर भी शामिल है, जहां सावन में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है।
यहां श्रद्धालुओं की सुविधा के विस्तार एवं कायाकल्प पर एक करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी जयेंद्र कुमार ने नए वर्ष पर परिषद की प्रस्तावित योजनाओं के बारे में पत्रकारों से जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि तीर्थ विकास परिषद का उद्देश्य अयोध्या क्षेत्र के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का विकास करना है, जिसमें पर्यटन को बढ़ावा देना, विरासत का संरक्षण और बुनियादी ढांचे में सुधार शामिल है। परिषद अपने इस उद्देश्य को लेकर लगातार आगे बढ़ रहा है।
वर्ष 2026 में जिले के आठ धार्मिक स्थलों को विकास लिए चिह्नित किया गया है, जिस पर 12 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनमें गहनाग बाबा मंदिर, अयोध्याधाम के बेतिया मंदिर परिसर में पर्यटन सुविधाओं का विकास, मणि पर्वत क्षेत्र में पाथ-वे, साइनेज, बेंच एवं प्रकाश की व्यवस्था, दशरथ समाधि स्थल के निकट शिव मंदिर के आसपास पर्यटन विकास का टेंजर जारी हुआ है।
वहीं, आलापुर दोस्तपुर में महर्षि बाल्मिकी आश्रम का पर्यटन विकास, रुदौली के कुढ़ासादात में अंबेडकर पार्क का विकास एवं भरत कुंड में भरत की तपोस्थली का पर्यटन विकास शामिल है। जल्द ही इन परियोजनाओं का टेंडर आदि जारी होगा।
परिषद 93.79 करोड़ रुपये की 13 परियोजनाओं पर तीर्थ विकास परिषद पहले से ही काम कर रहा है। यह परियोजनाएं वर्ष 2024-2025 की हैं, जिसमें 17 परियोजनाएं चयनित हैं।
दो परियोजनाएं लटकी
वर्ष 2024-025 में स्वीकृत हुई गुलाबाबाड़ी में सुंदरीकरण एवं साकेत सदन में संग्रहालय निर्माण पर अभी कार्य शुरू नहीं हो सका है। गुलाबाबाड़ी के कार्य को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से अभी स्वीकृति नहीं मिली है। यह फाइल एएसआई के दिल्ली मुख्यालय में पेंडिंग है।
यदि इसे स्वीकृति नहीं मिली तो तीर्थ विकास परिषद इस योजना को ड्राप कर सकता है। इसी प्रकार साकेत सदन(अफीम कोठी) में परिक्रमा संग्रहालय का कार्य भी होना शेष हैं।

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