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    मोबाइल रेडिएशन बच्चों के लिए खतरनाक, RF किरणें मस्तिष्क को पहुंचाती हैं नुकसान

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 09:35 PM (IST)

    मोबाइल फोन से निकलने वाला रेडिएशन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक है। आरएफ किरणें बच्चों के मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं, जिससे मस्त ...और पढ़ें

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    मोबाइल रेडिएशन बच्चों के लिए खतरनाक।

    जागरण संवाददाता, अमरोहा। मोबाइल फोन से निकलने वाला रेडिएशन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक साबित हो रहा है। इन्हें रेडियोफ्रीक्वेंसी यानि आरएफ किरणें कहा जाता है। जोकि बच्चों के मस्तिष्क पर गहरा असर करती हैं। इनकी गर्मी के कुप्रभाव से बच्चों का मस्तिष्क सूखने लगता है तथा बाद में उसका असर सीधे ह्रदय पर भी हो सकता है। ऐसे में बच्चों को मोबाइल से दूर रखना जरुरी है।

    माता-पिता अक्सर बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल थमा देते हैं, लेकिन यह आदत भविष्य में जानलेवा भी बन सकती है। मंडी धनौरा में मोबाइल देखते हुए बच्चे की मौत हुई है। उसके पीछे भी चिकित्सक कहीं न कहीं मोबाइल रेडिएशन को कारण मान रहे हैं।

    जिला अस्पताल में कार्यरत वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ए. कुमार ने बताया कि बाल्यावस्था में बच्चों का मस्तिष्क पूरी तरह विकसित नहीं होता और वह बेहद संवेदनशील रहता है। ऐसे में मोबाइल से रेडियो फ्रीक्वेंसी किरणों के रूप में निकलने वाला रेडिएशन सीधे दिमाग को प्रभावित करता है।

    बाद में इसका असर हृदय पर भी पड़ता है, जिससे अचानक गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डा. कुमार का कहना है कि हाल में सामने आए मयंक जैसे मामलों के पीछे भी मोबाइल का अत्यधिक उपयोग एक बड़ा कारण माना जा रहा है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की अपील की है।





    अभिभावक बदलें आदत, बच्चों न दें मोबाइल


    जेएस डिग्री कालेज के मनोवैज्ञानिक डा. निखिल दास बताते हैं कि अमूमन अभिभावक बच्चों के हाथ में मोबाइल दे देते हैं। यह गलत है। यदि बच्चा रो रहा है या खाना नहीं खा रहा तो उसे मोबाइल देकर चुप कराने की आदत ठीक नहीं है। मौजूदा समय में माता-पिता दोनों नौकरीपेशा हैं तो भी वह बच्चों से दूर रहते हैं। ऐसे में मोबाइल ही बच्चे का साथी बन रहा है। लगातार मोबाइल के इस्तेमाल से बच्चे चिड़चिड़े भी हो रहे हैं। उनका मस्तिष्क पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बताया कि अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों के साथ समय व्यतीत करें। उन्हें बाहर खेलने के लिए घर से निकालें। मोबाइल से दूरी बनाना ही उनके स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।



    सालभर पहले भी हुई थी दो बच्चों की मौत


    हसनपुर: सालभर पहले भी हसनपुर में इसी प्रकार का मामला सामने आया था। 20 जनवरी 2024 को हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव हथियाखेड़ा निवासी महेश सिंह की 5 वर्षीय बेटी कामिनी की मोबाइल देखते हुए मृत्यु हो गई थी। वहीं मार्च 2025 में अमरोहा के मुहल्ला नई बस्ती में शमीम के 9 साल के बेटे की मौत भी मोबाइल देखने के दौरान हुई थी। स्वजन को वह बिस्तर पर मृत मिला था। जबकि पास में पड़ा मोबाइल चल रहा था।