मैडम कलेक्टर का 'हंटर': जाते-जाते CMO ने बांटी थी रेवड़ियां, DM ने एक झटके में निरस्त किए सभी आदेश
सीएमओ डॉ. सत्यपाल सिंह ने सेवानिवृत्ति से पहले 15 डॉक्टरों और कर्मचारियों को मनचाही तैनाती दी। विदाई कार्यक्रम के तुरंत बाद, जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, अमरोहा। स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्ति पर जाते-जाते सीएमओ डा. सत्यपाल सिंह ने एक विवादास्पद कदम उठाया। विदाई समारोह के दौरान उन्होंने 15 डाक्टरों और कर्मचारियों को मनचाही तैनाती देने का निर्णय लिया। जैसे ही विदाई कार्यक्रम समाप्त हुआ, कर्मचारी नई जगहों पर ज्वाइन करने पहुंचे, तभी जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने हस्तक्षेप करते हुए तबादलों को निरस्त कर दिया।
इस घटनाक्रम ने विभाग में खलबली मचा दी और कर्मचारी मायूस होकर अपनी पूर्व तैनाती पर लौट गए। सीएमओ डा. सत्यपाल सिंह पहले से ही विभाग में चर्चा का विषय बने हुए थे, लेकिन उनके सेवानिवृत्ति के समय उठाए गए इस कदम ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया। 31 दिसंबर को उनका रिटायरमेंट हुआ और अंतिम दिन उन्होंने अपने कार्यालय में सभी कर्मचारियों को खुश होकर विदाई दी।
उन्होंने पांच डाक्टरों, चार एएनएम, तीन स्टाफ नर्स और तीन बाबुओं समेत कुल 15 कर्मचारियों को नई तैनाती दी, जिससे पूरे महकमे में हलचल मच गई। एक जनवरी को कर्मचारियों ने सीएमओ को शानदार विदाई दी और नई तैनाती के लिए अपने कार्यस्थलों पर ज्वाइनिंग के लिए चल पड़े। लेकिन, डीएम को सीएमओ और कर्मचारियों की खुशी की भनक लग गई।
उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी तबादलों को निरस्त कर दिया। कर्मचारियों के कार्यस्थलों पर पहुंचने के साथ ही निरस्तीकरण का आदेश भी पहुंच गया, जिससे वे बिना ज्वाइनिंग के ही वापस लौट गए। सूत्रों के अनुसार इस अदला-बदली में सीएमओ कार्यालय में तैनात डा. सुखदेव को फिर से जोया सीएचसी प्रभारी बना दिया गया था।
जैसे ही वह सीएचसी जोया पहुंचे, उन्हें दूसरा आदेश मिल गया और उन्हें वापस लौटना पड़ा। इस खेल का भंडाफोड़ होते ही पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। अब कर्मचारी पूर्व तैनाती पर लौट आए हैं और इस मामले में पोल खोलने वाले विभीषण की तलाश कर रहे हैं।
जो खोया, अब कैसे मिले
पुराने साल में मनचाही तैनाती के लिए कर्मचारियों ने बहुत कुछ खोया है। उन्होंने सोचा था कि नए साल में नई जगह ज्वाइनिंग करेंगे, लेकिन डीएम की तिरछी नजर ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया। अब वे सोच में हैं कि जो खोया है, उसे कैसे पाया जाए। विभाग की फजीहत पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कर्मचारी मन ही मन चिंतित हैं।
अल्ट्रासाउंड का नवीनीकरण रोका, डा.याला भी नजर में चढ़े
एक डाक्टर, दो अल्ट्रासाउंड केंद्र व दो की तैयारी... का मामला सामने आने के बाद से ही डीएम की नजर साहब की गतिविधियों पर जमी थीं। इसके अलावा डा.रमेश कुमार याला भी उनकी निगाहों में चढ़ गए थे। ऐसा होना भी लाजमी था क्योंकि, डा.याला की डिग्रियों का ही प्रयोग चारों अल्ट्रासाउंड केंद्रों में किया जा रहा था। गर्दन फंसने के डर से डा.याला ने संभल, बिजनौर व हापुड़ के डीएम को शपथ पत्र भेजकर शिकायत की थी कि उनके शैक्षिक अभिलेखों का बिना मर्जी के साथ अल्ट्रासाउंड केंद्रों में इस्तेमाल किया जा रहा है।
इधर शौर्य अल्ट्रासाउंड केंद्र बंद होने की बजाय सीएमओ साहब कागजों में लगातार चलवा रहे थे। उसके नवीनीकरण में साहब ने डा.याला की डिग्री लगाई। चाैथे केंद्र के नवीनीकरण में भी एक डाक्टर की डिग्री लगाने के खेल का पर्दाफाश होने के बाद डीएम ने उसकी अगली कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
सीएमओ की ओर से अंतिम दिन कुछ डाक्टर और कर्मचारियों के ट्रांसफर किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद सभी कर्मचारियों के तबादले निरस्त कर दिए गए हैं। वे पूर्व की भांति अपनी जगहों पर ही काम करेंगे।
- निधि गुप्ता वत्स, डीएम
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