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    Birth anniversary of Swami Vivekananda : ध्यान और ज्ञान की ज्योति जला रहा प्रयागराज में रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम

    By Ankur TripathiEdited By:
    Updated: Sun, 10 Jan 2021 11:49 AM (IST)

    Vivekanand रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के युवा प्रभाग के प्रभारी स्वामी करुणानंद कहते हैं कि स्वामी विवेकानंद ने मानव जाति की निस्वार्थ सेवा पर बल दिया। इन ...और पढ़ें

    आश्रम की डिस्पेंसरी में रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर बैठते हैं और न्यूनतम शुल्क लेकर इलाज करते हैं।

    प्रयागराज, जेएनएन। प्रत्येक व्यक्ति में स्वामी विवेकानंद के विचारों को जाग्रत करने का महायज्ञ प्रयागराज में चल रहा है। इसकी शुरुआत 1910 में रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम की स्थापना के साथ हुई थी। अब तक 3000 युवा ज्ञान, ध्यान, दर्शन, अध्यात्म के साथ तकनीक की समझ लेकर देश के नवनिर्माण के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। 

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    रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के युवा प्रभाग के प्रभारी स्वामी करुणानंद कहते हैं कि स्वामी विवेकानंद ने मानव जाति की नि:स्वार्थ सेवा पर बल दिया। इन्हीं लक्ष्यों के साथ रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम कार्य कर रहा है। यहां प्रत्येक रविवार को व्यक्तित्व विकास शिविर चलता है। इसमें कक्षा छह से स्नातकोत्तर व प्रतियोगी परीक्षाओं के युवा शामिल होते हैं। उन्हें विषय ज्ञान के साथ तकनीक, दर्शन, अध्यात्म सहित देश दुनिया की घटनाओं व उनके प्रभावों से भी अवगत कराया जाता है। इसमें 100 से अधिक लोग शामिल होते हैं। कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की निश्शुल्क कोचिंग चलाई जाती है। गदाधर अभ्युदय प्रकल्प कहते हैं कि प्रत्येक बच्चे को पौष्टिक आहार, ड्रेस, स्टेशनरी, बस्ते आदि भी निश्शुल्क दिया जाता है।

    व्यक्तित्व विकास शिविर ऑनलाइन: रविवार को चलने वाला व्यक्तित्व विकास शिविर कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद से ऑनलाइन संचालित किया जा रहा है। गूगल मीट के जरिए विषयों के विशेषज्ञ व्याख्यान देते हैं। 

    दी जा रही है कम्प्यूटर की शिक्षा: स्वामी करुणानंद कहते हैं कि स्वामी जी का मानना था कि धर्म को रोटी से जोड़ो। 2008 में शुरू हुए कम्प्यूटर सेंटर में 50 विद्यार्थी हर वर्ष शिक्षा लेते हैं। जो रोजगार करने में सक्षम होते हैं। 

    आश्रम में है समृद्ध पुस्तकालय: सेवाश्रम के समृद्ध पुस्तकालय में साहित्य, दर्शन, विज्ञान, सामान्य ज्ञान सहित कई विषयों की पुस्तकें हैं। 10 लाख हर साल खर्च होते हैं। घर ले जाने के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैंं।

    डिस्पेंसरी का हो रहा संचालन: आश्रम की डिस्पेंसरी में रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर बैठते हैं और न्यूनतम शुल्क लेकर इलाज करते हैं। स्वामी करुणानंद कहते हैं कि यह शुल्क व्यवस्थाएं संचालित करने के लिए लिया जाता है। 

    सृजनशीलता को प्रतियोगिताएं : एक माह चलने वाली प्रतियोगिता में निबंध, भाषण, कला आदि पर चर्चा प्रमुख हैं। सांस्कृतिक विरासत दिखाने के साथ विज्ञान केंद्रों व उनसे जुड़े महान लोगों से भी मिलवाया जाता है।