World Environment Day: संगम तट पर पीपल, बरगद और पाकड़ के 400 पेड़, प्रयागराज के लोगों को दे रहे प्राणवायु
2001 कुंभ के दौरान तत्कालीन कमिश्नर सदाकांत शुक्ला ने यहां पर पौधे लगवाने की पहल की। उस दौरान उन्होंने त्रिवेणी मार्ग लाल मार्ग काली मार्ग अक्षय वट म ...और पढ़ें

प्रयागराज, प्रमोद यादव। गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम तट धार्मिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही, शहर और आसपास के पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी यह अहम है। यहां से प्राणवायु भी मिल रही है शहर को। यहां लगाए गए पीपल, बरगद और पाकड़ के करीब 400 पेड़ भरपूर आक्सीजन दे रहे हैं। इन पेड़ों की छांव में सुबह और शाम वाकिंग करने वालों की भीड़ लगी रहती है। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ पीपल, पाकड़ और बरगद के पेड़ शायद ही कहीं हो।
पहले वीरान था माघ मेला क्षेत्र, नहीं थे पेड़ पौधे
दो दशक पहले तक संगम किनारे स्थित सैकड़ों हेक्टेयर का परेड मैदान वीरान था। केवल मेला के दौरान ही यह गुलजार होता था। लेकिन 2001 कुंभ के दौरान तत्कालीन कमिश्नर सदाकांत शुक्ला ने यहां पर पौधे लगवाने की पहल की। उस दौरान उन्होंने त्रिवेणी मार्ग, लाल मार्ग, काली मार्ग, अक्षय वट मार्ग, जगदीश रैंप, बांध आदि के किनारे करीब एक हजार पौधे लगवाए। इसमें उन्होंने सबसे अधिक पीपल के पौधे लगवाए। इसके अलावा बरगद, पाकड़ और नीम के भी पौधे लगवाए। पौधे लगवाने के साथ ही उनकी सुरक्षा का भी प्रबंध किया। लगभग सभी में ट्री गार्ड लगवाए। खुला मैदान होने के कारण करीब छह सौ पौधों को पशुओं ने नष्ट कर दिया। लेकिन जो बच गए, अब वह हरियाली देेने के साथ ही शहर की आबोहवा को शुद्ध कर रहे हैं। संगम क्षेत्र के लगभग मार्ग पर अब छांव है। पीपल के पेड़ों की कतार देखते ही बनती हैं। भीषण गर्मी में भी इन पेड़ों के नीचे लोगों को सुकून मिलता है। उसके बाद कुछ पौधे 2013 के कुंभ में लगाए गए। बीते माघ मेले के दौरान भी पीपल और पाकड़ के करीब 50 पौधे वन विभाग की ओर से लगाए गए हैं।

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