Mohan Bhagwat: होली के बाद पांच दिन का प्रवास करेंगे संघ प्रमुख मोहन भागवत, 14 वर्ष बाद आएंगे अलीगढ़
Aligarh News डाक्टर मोहन भागवत 14 वर्ष बाद अलीगढ़ आ रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉक्टर मोहन भागवत 17 से 21 अप्रैल तक अलीगढ़ में रहेंगे। वह केशव सेवा धाम में संघ की गतिविधियों की समीक्षा करेंगे और संघ शताब्दी वर्ष पर चर्चा करेंगे। उनके साथ आगरा और बरेली मंडल के संघ पदाधिकारी और प्रचारक भी रहेंगे।

संताेष शर्मा, जागरण, अलीगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक डॉक्टर मोहन भागवत के अलीगढ़ में आगमन को लेकर तैयारी तेज हो गई हैं। संघ प्रमुख मथुरा रोड स्थित केशव सेवा धाम में 17 से 21 अप्रैल तक प्रवास करेंगे। यहां वह संघ की गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। संघ शताब्दी वर्ष भी मना रहा है। इसको लेकर भी संघ के बंधुओं से बातचीत होगी। साथ ही राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर भी यहां चर्चा होगी। अलीगढ़ से उठने वाली आवाज दूर तक जाती है। ऐसे में उनका दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सर संघ चालक डाक्टर मोहन भागवत 14 वर्ष बाद अलीगढ़ आ रहे हैं। इससे पहले 2011 में एचबी इंटर कालेज में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे। सर संघचालक डा. मोहन भागवत का दौरा पहले तीन दिवसीय बताया जा रहा था, लेकिन अब पांच दिन प्रवास करेंगे।
संघ के प्रचारकों के साथ भी करेंगे बैठक
अलीगढ़ के अलावा आगरा और बरेली मंडल संघ पदाधिकारी संघ प्रमुख के साथ बैठकों में मौजूद रहेंगे। साथ ही संघ के प्रचारकों के साथ भी बैठक करेंगे। भाजपा के नेताओं का भी जमघट रहेगा। हालांकि, सभी का प्रवेश बंद रहेगा। प्रदेश सरकार के मंत्री भी आ सकते हैं। संघ प्रमुख का सुबह और शाम की शाखाओं में प्रवास रहेगा, जिसके लिए अभी से शाखाओं पर स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ाने के प्रयास शुरू हो गए हैं।
रविवार को अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित शाखा टोली एकत्रीकरण कार्यक्रम को तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। यह आयोजन भी सफल रहा। जिसमें 1200 से अधिक स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल हुए। स्वयंसेवकों को योग व्यायाम भी कराया गया। माना जा रहा है डॉक्टर भागवत के कार्यक्रम में इसे कराया जा सकता है।
संघ का पंच परिवर्तन का संकल्प
संघ ने पंच परिवर्तन का भी संकल्प लिया है। जिसमें कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से भारत की प्राचीन कुटुंब आधारित व्यवस्था को पुनः स्थापित करना है। कुटुंब व्यवस्था को मजबूत बनाना। धर्म जागरण समाज के बीच धर्म जागरण का कार्य भी करना है। सामाजिक समरसता समाज के अंदर चल रहे भेदभाव को समाप्त कर सामाजिक समरसता का भाव जगाना भी लक्ष्य है। स्वदेशी भाव जगाना भारतीय समाज को स्वदेशी का भाव भी जागृत करना है, जिससे अपने समाज अपने नागरिकों और अपने देश में निर्मित वस्तुओं के प्रति भाव जागृत हो और देश का आर्थिक विकास हो। नागरिक कर्तव्य, भारतीय संविधान में वर्णित राष्ट्र के प्रति मूल कर्तव्य और नागरिक कर्तव्यों का बोध जागृत करना है।
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1925 में हुई थी संघ की स्थापना
दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की गई थी। 2025 में यह संगठन 100 साल का हो जाएगा। हेडगेवार ने अपने घर पर 17 लोगों के साथ गोष्ठी में संघ के गठन की योजना बनाई। बैठक में हेडगेवार के साथ विश्वनाथ केलकर, भाऊजी कावरे, अण्णा साहने, बालाजी हुद्दार, बापूराव भेदी आदि मौजूद थे।
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