अलीगढ़ (जेएनएन)।  पद्मभूषण, महाकवि डॉ. गोपालदास नीरज प्रेम व सौंदर्य के कवि तो हैैं ही, उनकी कविता में अध्यात्म, दर्शन व सूफिज्म भी है। वे हिंदी के सिद्ध कवि तो थे ही, उर्दू के मुकम्मल शायर भी रहे। उन्हें गीतकार, गजलकार, दोहाकार, हाईकूकार कहा गया। उनकी खूबी सरस, किंतु रहस्यमयी भाषा से है, जो प्रोफेसर ने समझी तो आम आदमी ने भी। महाकवि के 94वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर गुरुवार को दैनिक जागरण के तालानगरी कार्यालय में वरिष्ठ साहित्यकारों की परिचर्चा का यही निचोड़ रहा।

हिंदी कविता के गौरव थे नीरज

हाथरस के बॉगला इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य व साहित्य भूषण से सम्मानित डॉ. पशुपतिनाथ उपाध्याय ने कहा नीरज हिंदी कविता के गौरव थे। गेयता, संगीतात्मकता व लयात्मकता उनकी पहचान है। उन्होंने बेहिचक ङ्क्षहदी में उर्दू शब्द शामिल किए। सरस भाषा में रहस्यमयी कविताएं लिखीं, जो सड़क से लेकर संसद तक गूंजीं। 'आदमी हूं, आदमी से प्यार करता हूं...Ó सुनकर हर कोई आह्लादित हो जाता है। उनकी परिभाषा में प्रेम को न जानने वाला ही चरित्रहीन है। उनकी कविताओं में ओशो का दर्शन है, मगर फूहड़ता नहीं। डॉ. उपाध्याय ने 'नीरज की पातीÓ पर गहन शोध व स्मृति ग्र्रंथ निकालने की जरूरत बताई।

क्लिष्ट नहीं होती भाषा

 डीएस डिग्री कॉलेज से सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर व साहित्य भूषण से सम्मानित डॉ. वेद प्रकाश अमिताभ ने कविता में भाषायी क्लिष्टता से ग्राह्यता की कमी को निराधार बताया। कहा, भाषा क्लिष्ट नहीं होती, सिर्फ शब्द परिचित व अपरिचित होते हैं। भाषा को क्लिष्ट मानते तो निराला को आज कोई नहीं जानता। नई कविता को छंद के अभाव में यथोचित सम्मान नहीं मिल पा रहा। अब लिखने-पढऩे वाले सीमित हैं। नीरज की कविता में परिवेश व आंतरिक प्रमाणिकता है। अगर तीसरा युद्ध हुआ तो...कारवां गुजर गया...अब कोई मजहब ऐसा भी चलाया जाए...ऐसी ही कविताएं हैैं।

एकेडमिक ख्याति न मिलने की बात गलत

नीरज को एकेडमिक ख्याति न मिलने को विद्वानों ने खारिज कर दिया। डॉ. अमिताभ ने कहा कि उन पर 50 से ज्यादा शोध हुए। सैकड़ों निबंध लिखे गए। यशभारती, विश्व उर्दू परिषद पुरस्कार, पद्मश्री, पद्मभूषण जैसे सम्मान मिले। फिल्म फेयर अवार्ड भी मिले। साहित्य एकेडमी पुरस्कार नहीं मिला तो इसका कारण नीरज ही हैैं। यह संस्था पुस्तक पर पुरस्कार देती है, व्यक्ति पर नहीं। व्यक्ति पर मिलता तो कब मिल गया होता। नीरज ने पुस्तक भेजी नहीं।

नीरज ने बढ़ाया उत्साह

खुशअदा, खुशख्याल थे नीरज : उर्दू शायर रिहाना शाहीन ने नीरज को कुछ यूं श्रद्धांजलि दी...

खुशअदा, खुशख्याल थे नीरज। रोशनी की मिसाल थे नीरज।।

ये अटलजी ने भी किया तसलीम। शायर बाकमाल थे नीरज।।

बकौल शाहीन, 30 साल नीरजजी के साथ मंचों का साथ रहा। उनकी शायरी सबको आनंदित करती थी। 1987 में नुमाइश के मुशायरे में पहली बार मंच साझा किया। उन्होंने उत्साह बढ़ाया तो खुशी का ठिकाना न रहा।

आधुनिक युग के जायसी थे नीरज

कवि डॉ. अशोक अंजुम ने कहा कि नीरजजी ने हमेशा नवरचनाकारों का उत्साह बढ़ाया। कुछ कमजोर भी 'कृपाÓ पा गए। उन पर उंगलियां भी उठीं। नीरजजी खुद को अध्यात्म का कवि मानते थे। मेरी नजर वे आधुनिक युग के मलिक मुहम्मद जायसी थे। उनके गीत.. ऐ भाई जरा देख के चलो...में पूरे जीवन का निचोड़ है। वे अच्छे ज्योतिषी भी थे।

नीरज में था फक्कड़पन, लड़कपन भी 

वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. मधु आंधीवाल ने कहा कि नीरज की ख्याति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक बार पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने मुझसे आग्र्रह किया कि नीरज से भेंट करा दो। इतनी महान हस्ती थे वो। पर, नीरज के अंदर एक बच्चा था। कभी जिद्दी हो जाते, कभी फक्कड़ी तो कभी लड़कपन दिखाने लगते। रामघाट गंगा स्नान को गए तो ऊंचे स्थान से छलांग लगा दी। हम सब चिंता में खोज रहे, वो डुबकी में मस्त। एक बार सुरेंद्र सुकुमार के गांव गए तो देखा कि दादा (नीरजजी) के पीछे एक शख्स दौड़ा आ रहा है। दादा ने मेरे थैले में तीन आम छुपा दिए। दादा से अनजान वो शख्स उन्हें खरी-खोटी सुनाते हुए तीनों आम थैले से निकाल ले गया। बाद में, दादा ने छुपाया आम नीचे से निकाला और खाने लगे। टोकने पर बोले, 'चोरी का आम खाने का मजा ही कुछ और है।Ó कवि श्याम सुंदर 'श्यानÓ ने नीरज को समर्पित गीत 'दिल में चुभन आंखों में बह रहे नीर हैं, तुम्हारे बिना नीरज हम बड़े अधीर हैं... सुनाकर भावविभोर कर दिया। परिचर्चा का संचालन संपादकीय प्रभारी नवीन सिंह पटेल ने किया।

Posted By: Mukesh Chaturvedi

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