Agra: जंगल बचाने में मिली सफलता, 403 नहीं अब 800 हेक्टेअर का होगा सूर सरोवर पक्षी विहार
Agra News याचिकाकर्ता डा. शरद गुप्ता की ओर से पैरवी अधिवक्ता अंशुल गुप्ता ने की।यह क्षेत्र जुड़ेगासूर सरोवर पक्षी विहार के क्षेत्र में एमओईएफसीसी द्वारा पूर्व में सूरदास रिजर्व फारेस्ट ब्लाक और सरकारी जमीन को शामिल नहीं किया गया था।

आगरा, जागरण संवाददाता। रामसर साइट सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम) का क्षेत्र अब 403 हेक्टेअर नहीं, बल्कि 800 हेक्टेअर का होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) की रिपोर्ट को बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लिया है। शहर के पर्यावरण कार्यकर्ता डा. शरद गुप्ता को चार वर्ष के संघर्ष के बाद पक्षी विहार के जंगल को बचाने में सफलता मिली है।
पर्यावरण कार्यकर्ता ने डाली थी जनहित याचिका
पर्यावरण कार्यकर्ता डा. शरद गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) द्वारा सूर सरोवर पक्षी विहार का क्षेत्र गलत निर्धारित करने पर जनहित याचिका दायर की थी। 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति अभय एस. ओका की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने सीईसी द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट को बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लिया। डा. शरद की याचिका को डिस्पोज आफ कर दिया गया है। अब इस पर सुनवाई नहीं होगी।
पक्षी विहार को शामिल करने की बात कही
सीईसी ने अपनी रिपोर्ट में सूर सरोवर पक्षी विहार के क्षेत्र को 403 से बढ़ाकर करीब 800 हेक्टेअर किए जाने की बात कही है। सीईसी ने 380.558 हेक्टेअर के सूरदास रिजर्व फारेस्ट ब्लाक और 15.514 हेक्टेअर सरकारी जमीन को पक्षी विहार के क्षेत्र में शामिल करने की बात कही है। इसे शामिल किए जाने के बाद ही पक्षी विहार का ईको सेंसिटिव जोन निर्धारित किया जाएगा।
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मान्य नहीं होगी अधिसूचना
एमओईएफसीसी ने सूर सरोवर पक्षी विहार के क्षेत्र निर्धारण को प्रारंभिक अधिसूचना 24 अप्रैल, 2018 को की गई थी। प्रारंभिक अधिसूचना और एमओईएफसीसी की बैठक के कार्यवृत्त में कीठम का क्षेत्र 403 हेक्टेअर दर्शाया गया था। कीठम के क्षेत्र को 800 हेक्टेअर से घटाकर 403 हेक्टेअर दर्शाए जाने पर पर्यावरण कार्यकर्ता डा. शरद गुप्ता ने आपत्ति जताई थी।
उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, मुख्य सचिव उप्र, वन विभाग, ताज ट्रेपेजियम जोन के चेयरमैन समेत 13 अफसरों को वर्ष 2019 में 29 जुलाई, दो अगस्त और 20 अगस्त को पत्र भेजे।
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पक्षों को जारी किए नोटिस
अधिकारियों द्वारा उनकी आपत्ति का संज्ञान नहीं लिया गया और 10 अक्टूबर, 2019 को अंतिम अधिसूचना कर दी गई। इसके खिलाफ डा. शरद गुप्ता ने 19 दिसंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जनहित याचिका को एमसी मेहता बनाम यूनियन आफ इंडिया वाद में जोड़कर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी, 2021 को संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए थे।
दोबारा जारी करनी होगी अधिसूचना
सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी, 2021 को सीईसी को मामला सौंप दिया था। सीईसी ने 25 नवंबर, 2021 को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीईसी की रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद अब कीठम के क्षेत्र के निर्धारण को दोबारा अधिसूचना करनी होगी।
चार वर्ष का संघर्ष रंग लाया है। जंगल और जमीन को बचाने की जो लड़ाई लड़ी थी, उसमें सफलता मिली है। शहर का 400 हेक्टेअर का जंगल अब सुरक्षित रह सकेगा। - डा. शरद गुप्ता, पर्यावरण कार्यकर्ता

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