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    Naag Panchami 2021: 13 अगस्त को है नाग पंचमी, पूजन मुहूर्त के साथ यहां पढ़ें त्योहार की कथा भी

    By Tanu GuptaEdited By:
    Updated: Tue, 10 Aug 2021 05:54 PM (IST)

    Naag Panchami 2021 इस वर्ष नाग पंचमी 13 अगस्त को है। धर्म वैज्ञानिक पंडित वैभव जय जोशी के अनुसार नाग पंचमी के दिन अनन्त वासुकि पद्म महापद्म तक्षक कुली ...और पढ़ें

    13 अगस्त को है इस वर्ष नाग पंचमी का पर्व।

    आगरा, जागरण संवाददाता। सनातन धर्म में प्रकृति और प्राणी को देवतुल्य माना गया है। देश की संस्कृति एेसी है कि पर्व− त्योहार सभी पर किसी न किसी रूप से इनकी पूजा की जाती है। विशेषकर नाग पंचमी को तो पूर्ण रूप से नाग देवता काे समर्पित किया गया है। इस वर्ष नाग पंचमी 13 अगस्त को है। धर्म वैज्ञानिक पंडित वैभव जय जोशी के अनुसार नाग पंचमी के दिन अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट, शंख, कालिया और पिंगल नामक देव नागों की पूजा की जाती है। सावन मास की शुक्ल पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। हिंदू धर्म में नागों की पूजा के इस पावन पर्व का बहुत महत्व है। इस दिन भगवान शिव के आभूषण नाग देव की पूजा की जाती है।

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    नाग पंचमी दिन और मुहूर्त

    पंचमी तिथि प्रारंभ- 12 अगस्त 2021 को दोपहर 3 बजकर 24 मिनट से

    पंचमी तिथि समाप्त-13 अगस्त 2021 को दोपहर 1 बजकर 42 मिनट तक

    पूजा का शुभ मुहूर्त- 13 अगस्त 2021 सुबह 5 बजकर 49 मिनट से सुबह 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।

    क्या है मान्यता

    कई पौराणिक ग्रंथों में भी नाग पंचमी का उल्लेख मिलता है। मान्यताओं के अनुसार, जो कोई भी इस विशेष दिन नाग देव की पूजा करता है, उसे उन सभी प्रकार के दुर्भाग्य से मुक्ति मिल जाती है, जो उन पर अशुभ ग्रहों राहु और केतु द्वारा लाए जाते हैं। वैदिक ज्योतिष भी इस दिन काल सर्प योग अनुष्ठान करने का आह्वान करता है ताकि सांप के भय से छुटकारा और सांप के काटने की संभावना से छुटकारा मिल सके।

    सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।

    ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥

    ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।

    ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥

    नाग पंचमी की कथा

    नाग पंचमी को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है इसका वर्णन कई तरह से किया गया है। भविष्यपुराण के अनुसार, जब सागर मंथन हुआ था तब नागों ने अपनी माता की आज्ञा नहीं मानी थी। इसके चलते नागों को श्राप मिला था। नागों को कहा गया था कि वो राजा जनमेजय के यज्ञ में जलकर भस्म हो जाएंगे। इससे नाग बहुत ज्यादा घबरा गए थे। इस श्राप से बचने के लिए सभी नाग ब्राह्माजी की शरण में पहुंचें। उन्होंने ब्रह्माजी से सारी बात कही और मदद मांगी। उन्होंने कहा कि जब नागवंश में महात्मा जरत्कारू के पुत्र आस्तिक होंगे तब वह सभी नागों की रक्षा करेंगे। यह उपाय ब्रह्माजी ने पंचमी तिथि को बताया था।

    जब महात्मा जरत्कारू के पुत्र आस्तिक मुनि ने नागों को यज्ञ में जलने से बचाया था तब सावन की पंचमी तिथि थी। आस्तिक मुनि ने नागों के ऊपर दूध डालकर उन्हें बचाया था। इसके बाद आस्तिक मुनि ने कहा था कि जो कोई भी पंचमी तिथि पर नागों की पूजा करेगा उसे नागदंश का भय नहीं रहेगा। तब से ही सावन की पंचमी तिथि पर नाग पंचमी मनाई जाती है।

    अन्य कथा

    एक बार एक किसान था जिसके दो बेटे और एक बेटी थी। वो सभी एक गांव में रहते थए और बहुत ही मेहनत करते थे। किसान अपने परिवार का पेट पालने के लिए हल चलाता था। एक दिन हल जोतते हुए गलती से उसने नागिन के अंडों को कुचल दिया। इससे नागिन के अंडे नष्ट हो गए। इस समय नागिन खेत में नहीं थी। लेकिन जब वो वापस आई तो उसने देखा कि उसे अंडे नष्ट हो चुके हैं। उसने बदला लेने की ठान ली। क्रोधित नागिन ने बदले की आग में किसान के दोनों बेटों को डस लिया और उनकी मौत हो गई। दोनों बेटों को डसने के पाद नागिन किसान की बेटी को भी डसना चाहती थी। लेकिन वो घर पर मौजूद नहीं थी। इसलिए वो इसे डस नहीं पाई।

    नागिन किसान की बेटी को भी डसना चाहती थी। लेकिन वो घर पर नहीं थी। किसान की बेटी को डसने के इरादे से नागिन अगले दिन फिर उसके घर पहुंची। वहां, किसान की बेटी ने एक कोटरी दूध नागिन के सामने रख दिया। यह सब देखकर वो बहुत हैरान हुई। उस लड़की ने नागिन से माफी मांगी। किसान की बेटी के क्षमाभाव को देखकर नागिन बेहद खुश हुई और उसके दोनों भाइयों को जीवित कर दिया। यह घटना श्रावण शुक्ल की पंचमी तिथि को हुई थी। इसी कारण इस दिन नागपंचमी मनाई जाती है।