आगरा, जागरण संवाददाता। दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक गुरुवार को रिलीज हो रही है। मेघना गुलजार निर्देशित फिल्म की कहानी एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल पर आधारित है। रील लाइफ में ये किरदार दीपिका पादुकोण निभा रहीं हैं, फिल्म में दीपिका का नाम मालती है। ताजनगरी में भी कई ऐसी ‘मालती’ हैं, जो इस दर्द से गुजर कर अब अपने परिवार का सहारा बनी हुई हैं।

बुधवार को छपाक का ट्रेलर रिलीज हुआ। इसे देखने के बाद शहर की इन मालतियों का कहना है कि गुरुवार को रिलीज हो रही फिल्म छपाक एसिड अटैक पीड़ितों की आवाज बनेगी। मालती ही नहीं सोशल मीडिया पर अभिनेत्री कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो पर स्वयं कंगना समेत कई दर्शकों की टिप्पणी है कि यह फिल्म दरिंदों के मुंह पर तमाचा होगी, जो अपनी हरकत में तो कामयाब हो गए पर अपने इरादों में नहीं। कंगना ने ट्वीट किया कि फिल्म का ट्रेलर देखकर मुङो अपनी बहन रंगोली के साथ हुए हादसे की सारी यादें ताजा हो गईं।

एसिड अटैक पीड़िता व अलीगढ़ निवासी शबनम ताजनगरी के शीरोज कैफे में काम करती हैं। तीन साल पहले एक ठेकेदार ने उनके चेहरे पर तेजाब फेंका था। शबनम के साथ ही काम कर रही डॉली उन खौफनाक पलों को याद कर सिहर उठती हैं, कहती है कि अब आत्मनिर्भर बन सुकून मिलता है। पढ़ाई के लिए जाते समय डॉली के ऊपर उन्हीं के पड़ोस में रहने वाले युवक ने तेजाब फेंका था। अभियुक्त सलाखों के पीछे हैं। रूपा की सौतेली मां ने पांच साल पहले उनके चेहरे पर तेजाब फेंका था। रूपा कहती है कि ये फिल्म समाज को नया आइना दिखाएगी। फिल्म को लेकर खुशबू, गीता, नीतू, मधु, बाला और रुकैया भी काफी उत्साहित हैं।

दिन में ज्यादा हुए हैं मामले

छांव फाउंडेशन के निदेशक आशीष शुक्ला ने बताया कि उनके संगठन ने अभी तक सौ एसिड अटैक पीड़ितों पर सर्वे किया। इसमें पाया गया कि 69 प्रतिशत अकेले लोगों ने युवती पर तेजाब फेंका। 29 प्रतिशत मामलों में एक से अधिक लोग युवती पर एसिड अटैक में शामिल रहे, जबकि दो प्रतिशत का पता नहीं चल सका। 59 प्रतिशत अविवाहित युवतियों और 41 प्रतिशत विवाहित महिलाओं पर तेजाब फेंकने की घटना हुई। 64 प्रतिशत मामले दिन में और 36 प्रतिशत मामले रात में हुए।

हिंदू महासभा ने दी चेतावनी

हिंदू महासभा ने छपाक फिल्म में दिखाई गई सत्य घटना में एसिड डालने वाले का नाम के साथ धर्म भी बदल दिया गया है। ये समाज के साथ धोखा है और बड़े षडयंत्र की साजिश है। नाम बदलने के बाद ही फिल्म को थियेटरों में चलने दिया जाएगा।

महासभा के प्रदेश प्रभारी मनीष अग्रवाल ने कहा कि निर्देशक ने वास्तविक कहानी को जनता तक पहुंचाने के लिए छपाक फिल्म बनाई है। इसमें एसिड अटैक करने वाले का नाम के साथ धर्म बदल दिया गया है, जिससे धार्मिक संवेदना पर आघात हुआ है। कहानी वास्तविकता पर आधारित है तो उनके किरदारों के नाम भी वास्तविक या उनसे मिलते जुलते होने चाहिए। नाम उसी धर्म से दिया जाएगा तभी फिल्म चलने दी जाएगी। सीएम योगी आदित्यनाथ से भी उप्र में फिल्म को प्रतिबंधित करने की मांग की जाएगी। 

Posted By: Prateek Gupta

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