आगरा, जागरण संवाददाता। ताजगंज स्थित विद्युत शवदाह गृह। गृह परिसर में न सुबह देखी जाती है और न ही रात। शव आते ही कर्मचारी टोकन बांटना शुरू कर देते हैं। हर दिन 40 से 45 शवों का अंतिम संस्कार होता है। गृह में चार में से तीन भट्ठी काम करती हैं।

ताजगंज स्थित मोक्षधाम। मोक्षधाम का परिसर भले ही बड़ा हो लेकिन कोविड महामारी में वह भी छोटा पड़ गया है। हाल यह है कि भैरों मंदिर के समीप की खाली जमीन पर चिताएं जल रही हैं। एक शव के अुंतिम संस्कार के लिए तीन कुंतल लकड़ियां दी जा रही हैं।

बल्केश्वर स्थित श्मशान घाट। इस घाट पर सुबह से ही शव का पहुंचना शुरू हो गया। हालांकि यहां टोकन बांटने की नौबत नहीं आई है। देर रात तक घाट पर अंतिम संस्कार होते रहते हैं।

यह तो सिर्फ तीन श्मशान घाटों का हाल है। शहर में सात प्रमुख श्मशान घाट हैं जहां सुबह से लेकर रात तक अंतिम संस्कार हो रहे हैं। एक दिन में सात प्रमुख घाटों पर 160 से 180 तक अंतिम संस्कार होते हैं। विद्युत शवदाह गृह में तो अपर नगर मजिस्ट्रेट चतुर्थ विनोद कुमार की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं नगर निगम द्वारा हर घाट पर अलग से नोडल अधिकारी की तैनात की गई है। घाटों पर पेयजल, मास्क सहित अन्य सुविधाएं देने का वादा किया गया लेकिन अधिकांश में यह नहीं हैं।

यह हैं श्मशान घाट 

शहर में कुल सात श्मशान घाट प्रमुख हैं जहां लोग अधिकांशतः पहुंचते हैं। विद्युत शवदाह गृह और मोक्षधाम ताजगंज, बल्केश्वर, फाउंड्री नगर, पोइया घाट, मलका का चबूतरा, कैलाश घाट।