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    दिल्ली से 240 KM दूर आगरा के इस इलाके में AQI बेहद कम, DEI का अनूठा मॉडल बना उदाहरण; इन कदमों से प्रदूषण पर लगाई लगाम

    By Sumit Kumar Dwivedi Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Mon, 05 Jan 2026 01:20 PM (IST)

    आगरा के दयालबाग में पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) शहर की तुलना में काफी कम रहता है। यहां सौर ऊर्जा, जैविक खेती और वाहनों ...और पढ़ें

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    आगरा के दयालबाग मे सोलर पैनल लगाने के साथ कम धूप की आवश्यकता वाले पौधे लगाए गए हैं।

    सुमित द्विवेदी . जागरण, आगरा। दिल्ली NCR से लेकर देश के कई बड़े शहरों में बढ़ते AQI को लेकर हल्ला मचा है। उपाय भी बेअसर साबित हो रहे हैं। वहीं अगर राधास्वामी मत से जुड़े दयालबाग में देखें तो यहां एक्यूआई धड़ाम ही रहता है। दरअसल यहां पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई कदम उठाए गए हैं। सौर ऊर्जा के साथ जैविक खेती हो रही है और कॉलोनियों में वाहनों की आवाजाही मना है। पैदल या साइकिल से लोग चलते हैं।

    ऊर्जा और कृषि को जोड़कर पर्यावरण संरक्षण का अनोखा माॅडल शहर में ही देखने को मिल रहा है। डीईआइ में लगे एग्रीवोल्टेइक सोलर प्लांट से ऊर्जा के साथ के खेती करने का भी मौका मिल रहा। वहीं, एक ही शहर में कुछ किलोमीटर की दूरी पर दो अलग-अलग तस्वीरें नजर आती हैं। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) शनिवार को 138 के स्तर पर रहा, जो मध्यम श्रेणी में है।

    वहीं राधास्वामी मत के दयालबाग शिक्षण संस्थान और यहां की कालोनी का एक्यूआइ 119 रहा। यह 19 अंकों का फर्क सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की एक जीती-जागती मिसाल है। यह आंकड़ा बताता है कि सही प्रयासों से प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    राधास्वामी मत के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीईआइ) और यहां की कालोनी प्रेम नगर, श्वेत नगर, कार्यवीर नगर, विद्युत नगर, स्वामी नगर, सरन आश्रम नगर, राधा नगर, दयालनगर, राधास्वामी नगर, मेहर बाग पर्यावरण संरक्षण में देश के लिए प्रेरणा बन रही है। यहां ईंधन आधारित वाहनों पर सख्त पाबंदी है।

    लोग मुख्य रूप से साइकिल या बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। नतीजा यह कि कार्बन उत्सर्जन न्यूनतम स्तर पर रहता है और हवा शहर के मुकाबले हमेशा स्वच्छ बनी रहती है। डीईआइ खुद नियमित रूप से वायु गुणवत्ता की निगरानी करता है, जिसकी रिपोर्ट बताती है कि दयालबाग सत्संगी कालोनी का एक्यूआइ ज्यादातर संतोषजनक या मध्यम श्रेणी में ही रहता है।

    1915 में स्थापित दयालबाग सत्संगी कालोनी आज एक स्वावलंबी और हरी-भरी कालोनी है। करीब 6.55 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह क्षेत्र 1973 में नगर पंचायत बना। यहां सात से आठ हजार लोग रहते हैं। शांत वातावरण, शिक्षण संस्थान और हरियाली से भरपूर यह इलाका शहर में ही अलग दुनिया है।

    यहां व्यस्त सड़कों की धूल-धुआं नहीं, बल्कि साइकिलों की घंटियां और इलेक्ट्रिक रिक्शों की आवाज गूंजती है। यह माॅडल सस्टेनेबल विकास का उदाहरण है, जहां ऊर्जा संरक्षण और कृषि को एक साथ जोड़ा गया है।

     

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    प्रो. सत्यप्रकाश।

     

    एक ही खेत में बिजली उत्पादन के साथ होती है खेती

    पर्यावरण संरक्षण की दिशा में दयालबाग का सबसे नवाचारी कदम है एग्रीवोल्टेइक सोलर प्लांट। विद्युत अभियंत्रिकी विभाग के शोध छात्र जितेंद्र बताते हैं यहां करीब 200 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट है। ऊंचे पोल पर लगे सोलर पैनल बिजली उत्पादन करते हैं, जबकि उनके नीचे खेती जारी रहती है।

    इससे भूमि का दोहरा उपयोग होता है ऊपर स्वच्छ ऊर्जा और नीचे फसलें। यहां चना, बैंगन, टमाटर जैसी सब्जियां उगाई जाती हैं। पैनल छाया प्रदान करते हैं, जिससे पानी की बचत होती है और फसलों को लाभ मिलता है। डीईआई कैंपस में कई रूफटॉप सोलर प्लांट भी हैं, जो संस्थान की बिजली जरूरतों को पूरा करते हैं।

    कम कार्बन उत्सर्जन करता है एग्रीवोल्टेइक माॅडल

    दयालबाग एयर क्वालिटी मानिटरिंग एंड रिसर्च ग्रुप के प्रभारी प्रो. सत्यप्रकाश बताते हैं यह एग्रीवोल्टेइक माडल न केवल कार्बन उत्सर्जन कम करता है, बल्कि कृषि भूमि का सौर ऊर्जा से दोहरा लाभ सुनिश्चित करता है। सरकार भी ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्रोत्साहन दे रही है।

    यह प्लांट सभी संस्थानों, किसानों और शहरों के लिए आदर्श है। जहां एक ओर शहर प्रदूषण से जूझ रहा है, वहीं डीईआइ और यहां की कालोनी अपनी पहलों से साबित कर रहा है कि ऊर्जा और कृषि का संयोजन पर्यावरण को नई जिंदगी दे सकता है। यह कालोनी पूरे जिले के लिए प्रेरणा स्रोत है।