एक जैसा नाम होने पर पुलिस ने निर्दोष को बना दिया बिजली चोर, 12 साल बाद 73 साल के तुहीराम को मिला इंसाफ
आगरा में एक 73 वर्षीय व्यक्ति, तुहीराम, को बिजली चोरी के एक मामले में 12 साल बाद निर्दोष बरी कर दिया गया। पुलिस की लापरवाही के कारण एक जैसे नाम वाले व ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, आगरा। बिजली चोरी के मामले में एक जैसा नाम होने के कारण पीड़ित 12 वर्ष तक आरोपित बना रहा। पुलिस की लापरवाही के कारण खुद को निर्दोष साबित करने के लिए उसने न्यायालय के 12 वर्ष तक चक्कर लगाए। विशेष न्यायाधीश आर्थिक अपराध ज्ञानेंद्र राव ने अछनेरा क्षेत्र के गांव साही निवासी 73 वर्षीय तुहीराम पुत्र मोहन को निर्दोष करार देते हुए बरी करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने आदेश में लिखा है कि बिजली विभाग आरोपित पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
बिल का भुगतान नहीं करने पर गांव साही में 22 नवंबर 2012 को बिजली विभाग की टीम ने बकायेदारों के कनेक्शन काट दिए थे। 29 नवंबर को चेकिंग में कुछ ग्रामीण कटिया डालकर बिजली चोरी करते हुए पकड़े गए। अवर अभियंता की ओर से अछनेरा थाने में बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना के बाद पांच आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। पुलिस ने आरोप पत्र में तुहीराम पुत्र मोहन को आरोपित बनाया था, जबकि बिजली विभाग की टीम ने बिजली चोरी करते हुए तुहीराम पुत्र मोना राम को पकड़ा था।
बिजली चोरी के मुकदमे में निर्दोष होने के बाद भी आरोपित बनाए जाने के लिए तुहीराम ने बिजली विभाग, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगाकर शिकायतें कीं, लेकिन समाधान नहीं निकला। 2014 में अदालत से नोटिस आने पर उनके होश उड़ गए। उन्हें निर्दोष होने बाद भी 12 साल अदालत के चक्कर काटने पड़े। अब अदालत ने उन्हें निर्दोष करार दिया है।
समाज में धूमिल हुई छवि, दामन पर लगा चोरी का दाग
निर्दोष करार दिए गए तुहीराम के दामन पर दाग पुलिस की लापरवाही से लगा। 73 वर्षीय किसान तुहीराम ने बताया कि समाज में उनकी छवि धूमिल हुई। उन्होंने हर विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन किसी ने उसकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया। न्यायालय के मामला पहुंचने पर उसकी पैरवी की। 12 साल तक न्यायालय के चक्कर लगाए। इसमें समय और धन दोनों बर्बाद हुआ। राहत इस बात कही है कि दामन पर लगा चोरी का दाग तो हट गया।
बताया कि 2007 में ही उन्होंने अपने नाम का कनेक्शन कटवाकर अपने बेटे कृष्णा के नाम से दूसरा कनेक्शन करा दिया था। उनके नाम पर कोई बिजली बिल भी बकाया नहीं था। 2012 में जब मुकदमा दर्ज हुआ तब तक उन्हें कुछ नहीं पता था। अदालत का नोटिस मिलने के बाद मामले की जानकारी हुई।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।