Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    ठंड में बालों वाले भालुओं की हालत भी हो गई पतली, सर्दी में परोसा जा रहा है शरीर को गर्मी देने वाला खाना

    By Sumit Kumar Dwivedi Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 08:14 PM (IST)

    आगरा के कीठम स्थित सूर सरोवर के पास वाइल्डलाइफ एसओएस भालू संरक्षण केंद्र में सर्दियों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पूर्व नाचने वाले स्लाथ भालुओं को ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    कीठम में भालू संरक्षण केंद्र में गुड़ के लड्डू खाते भालू।

    जासं, आगरा। कीठम स्थित सूर सरोवर के पास वाइल्डलाइफ एसओएस के भालू संरक्षण केंद्र में कड़ाके की सर्दी से भालुओं के बचाव को विशेष इंतजाम किए गए है। यहां रह रहे पूर्व नाचने वाले स्लाथ भालू ठंडी हवाओं से बेखौफ होकर धूप का आनंद ले रहे हैं। सर्दी से बचाव को केंद्र में विशेष रूप से गर्म तासीर वाला भोजन परोसा जा रहा है, जो इन भालुओं के शरीर को अंदर से गर्म रखता है। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है।

    वाइल्डलाइफ एसओएस का एक बड़ा स्लाथ भालू संरक्षण केंद्र है, जहां दर्जनों ऐसे भालू रहते हैं जो कभी सड़कों पर कलंदरों के साथ नाचने को मजबूर थे। अब ये भालू बड़े-बड़े घेरों में स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं। सर्दियों में इनकी देखभाल के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। भोजन में मुख्य रूप से गर्म दलिया शामिल है, जो बाजरा और रागी से बनाया जाता है।

    इसमें गुड़, शहद, खजूर, उबले अंडे और प्रोटीन युक्त गर्म ब्रोथ मिलाया जाता है। ये सामग्री शरीर में गर्मी पैदा करती हैं और इम्युनिटी बढ़ाती हैं। साथ ही विशेष ट्रीट्स के रूप में गुड़-मुरमुरे-मूंगफली की गेंदें या फुले चावल की बाल्स छिपाकर रखी जाती हैं। भालू इन्हें खेल-खेल में खोजते हैं, जिससे वे मानसिक रूप से सक्रिय और खुश रहते हैं।

    मौसमी फल और शहद से मिश्रित मिठाइयां भी दी जाती हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाती हैं और ऊर्जा प्रदान करती हैं। ये पौष्टिक आहार न केवल भालुओं को ठंड से बचाते हैं, बल्कि उन्हें स्वस्थ और चुस्त रखते हैं। संस्था के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया ये उपाय भालुओं को सर्दी से बचाने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। विशेषकर बुजुर्ग भालुओं को राहत मिलती है।

     

    बाड़ों में किए गए है विशेष इंतजाम

    बाड़ों में भी ठंड से बचाव के खास इंतजाम हैं। बुजुर्ग और गठिया से पीड़ित भालुओं के लिए हीटर लगाए गए हैं। सभी घेरों में सूखी घास और धान का भूसा बिछाकर मुलायम, गर्म बिस्तर तैयार किए गए हैं। ठंडी हवाओं से बचाने के लिए तिरपाल कवर और मोटे पर्दे लगाए गए हैं।

    खुले क्षेत्रों में हैमाक (झूले) पर घास बिछाकर अतिरिक्त गर्मी दी जाती है। कई भालू खुद गड्ढे खोदकर उनमें घास भरकर आराम करते हैं या धूप में लेटकर सेंक लेते हैं। दिन भर ये भालू सर्दियों में धूप निकलने पर बाहर आनंद लेते नजर आते हैं।