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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 19, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Sam Altman के बिना Worldcoin; कैसा होगा भविष्य और क्या होंगी चुनौतियां

By Shivani KotnalaEdited By: Shivani Kotnala
Published: Sun, 19 Nov 2023 09:17 AM (IST)

सैम ऑल्टमैन के क्रिप्टोकरेंसी प्रोजेक्ट वर्ल्डकॉइन (Worldcoin) को इसी साल 24 जुलाई को ग्लोबली लॉन्च किया गया था। सैम ऑल्टमैन ...और पढ़ें

Sam Altman के जाने के बाद Worldcoin का कैसा होगा भविष्य
Sam Altman के जाने के बाद Worldcoin का कैसा होगा भविष्य

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। सैम ऑल्टमैन के क्रिप्टोकरेंसी प्रोजेक्ट वर्ल्डकॉइन (Worldcoin) को इसी साल 24 जुलाई को ग्लोबली लॉन्च किया गया था। सैम ऑल्टमैन के ओपनएआई से जाने के एलान के बाद से ही वर्ल्डकॉइन (Worldcoin) की कीमत में गिरावट देखी गई है। वर्ल्डकॉइन (Worldcoin) की वैल्यू में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।

हालांकि, यह इतना भर ही नहीं है। ऑल्टमैन के जाने के बाद इस क्रिप्टोकरेंसी प्रोजेक्ट को लेकर नेतृत्व, नैतिक और परिचालन संबंधी चिंताएं बढ़ने लगी हैं।

ऑल्टमैन के जाने से क्या पड़ेगा असर

नेतृत्व का अभाव

Sam Altman के ओपनएआई से जाने के बाद हर किसी के जेहन में उनके क्रिप्टोकरेंसी प्रोजेक्ट वर्ल्डकॉइन को लेकर सवाल हैं। इसी के साथ वर्ल्डकॉइन के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ गए हैं। दरअसल, ऑल्टमैन की भूमिका उनके इस प्रोजेक्ट को लेकर एक फाउंडर के रूप में ही खास नहीं थी।

इस प्रोजक्ट को लेकर ऑल्टमैन की मौजूदगी भविष्य नीतियां को लेकर भी खास थी। ऐसे में ऑल्टमैन के जाने के बाद नेतृत्व के अभाव में प्रोजेक्ट पर इसके प्रभावों को लेकर इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी के जानकार लगातार चर्चा कर रहे हैं।

नैतिक चिंताएं

वर्ल्डकॉइन में आइडेंटिटी वेरिफिकेशन के लिए आईरिस स्कैन का इस्तेमाल विवाद का मुद्दा रहा है। इस अप्रोच को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। ऐसे में एक बार फिर प्राइवेसी, डेटा सिक्योरिटी और गलत इस्तेमाल जैसी चिंताओं पर सभी का ध्यान आ गया है। यानी वर्ल्डकॉइन को लेकर नैतिक चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

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परिचालन और तकनीकी परेशानियां

सैम ऑल्टमैन के जाने के बाद वर्ल्डकॉइन को परिचालन और तकनीकी कामों में भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। अलग-अलग देशों में क्रिप्टोकरेंसी और डेटा प्राइवेसी को लेकर अलग-अलग नियम हैं। ऐसे में वैश्विक बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली को लागू करने के साथ-साथ अरबों लोगों को डिजिटल करेंसी बांटना एक बड़ी चुनौती होगी।

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