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    GST का असर: असमंजस में कंप्यूटर डीलर्स, सही कोड सही टैक्स बना पहेली

    By Sakshi PandyaEdited By:
    Updated: Sat, 15 Jul 2017 07:49 PM (IST)

    जीएसटी के बाद ट्रेडर्स में जहां असमंजस की स्थिति है, वहीं टैक्स प्रोफेशनल इसे आसान मान रहे हैं। जीएसटी क्या है और इससे जुड़ी परेशानियों के बारे में यह ...और पढ़ें

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    GST का असर: असमंजस में कंप्यूटर डीलर्स, सही कोड सही टैक्स बना पहेली

    नई दिल्ली (साक्षी पंड्या)। "मैन्युफैक्चर्स 4 प्रोडक्ट बनाते हैं, सर्विस सेक्टर में एक टैक्स लगता है लेकिन ट्रेडर 50 चीजों का ट्रेड एक साथ करता है। ऐसे में जीएसटी आने के बाद अलग हर प्रोडक्ट अलग टैक्स का प्रावधान होगा तो कैसे काम कर पाएंगे?" यह झुझलायी टिप्पणी दिल्ली कंप्यूटर ट्रेडर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी स्वरन सिंह ने जीएसटी के बाद कम्प्यूटर बाजार का हाल पूछने वाले सवाल पर दी। इनके जवाब से ही आप अंदाजा लगा सकते हैं की GST से देश में आए बदलावों से केवल आप ही नहीं बल्कि मैन्युफैक्चर्स से लेकर ट्रेडर तक सभी परेशान और असमंजस की स्थिति में है।

    प्रोडक्ट कोड और टैक्स रेट पर असमंजस :

    दिल्ली कम्प्युटर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र अग्रवाल के मुताबिक अभी तक सभी प्रोडक्ट्स के कोड और टैक्स रेट को लेकर सफाई नहीं आई है। जिसकी वजह से तमाम व्यापारी इंपोर्ट हुआ सामान पोर्ट से नहीं उठा पा रहे हैं। साथ ही महेंद्र ने यह भी बताया कि अस्पष्टता की स्थिती में कंपनियां प्रोडक्ट की बिलिंग 28% की उच्चतम जीएसटी दर पर कर रही हैं। जिसका नुकसान व्यापारी को हो रहा है। साथ ही महेंद्र का यह भी कहना है कि कई कंपनियां प्रोडक्ट की बिलिंग एमआरपी पर जीएसटी लगाकर कर रही हैं। गौरतलब है कि सरकार ने हाल में ही यह स्पष्ट कर दिया था की सभी प्रोडक्ट की एमआरपी जीएसटी के साथ ही होगी।

    व्यापारियों में टैक्स पर असमंजस:

    स्वरन सिंह के अनुसार, ''कंप्यूटर बाजार के हाल इस समय बेहाल हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अफसर पद से लेकर ट्रेडर्स तक को जीएसटी के नियम कानून स्पष्ट नहीं हैं। उदहारण के लिए- कंप्यूटर पर ही जीएसटी के अंतर्गत अलग-अलग टैक्स लगाया जा रहा है। कंप्यूटर अलग-अलग पार्ट्स को मिला कर बनता है। और उसके पार्ट्स पर ही अलग-अलग टैक्स लग रहा है। ऐसे में यह स्थिति सभी के लिए समझना बेहद मुश्किल पड़ रहा है की किस पार्ट या एक्सेसरीज पर कितना टैक्स लगना है। जैसे-

    • कंप्यूटर की बॉडी पर 18 फीसद का टैक्स लगना है। वहीं, कंप्यूटर की पावर एक्सेसरीज पर 28 फीसद का टैक्स लगना है।
    • इसी के साथ 13.5 इंच की स्क्रीन के कंप्यूटर पर 18 फीसद टैक्स और उससे बड़ी स्क्रीन साइज पर 28 फीसद टैक्स लगाया जाना है।
    • लैपटॉप की बात करें तो उसमें भी स्क्रीन साइज के हिसाब से टैक्स अलग-अलग बंटे हुए हैं। लैपटॉप की बैटरी एडप्टर जैसे जरुरी एक्सेसरीज पर 28 फीसद का टैक्स लगाया जा रहा है।

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    इस तरह अलग-अलग पार्ट्स पर अलग-अलग टैक्स से तो देश में किसी मायने में वन नेशन वन टैक्स जैसी स्थिति देखने को नहीं मिल रही है। इसी क्रम में एसोसिएशन द्वारा वित्त मंत्री को पत्र भी लिखा गया है और यह निवेदन किया गया है की कम से कम वन इंडस्ट्री वन टैक्स कर दिया जाए, जिससे ट्रेडर्स इस स्थिति से उभर कर काम कर पाएं। इस स्थिति में पूरा काम लगभग ठप पड़ गया है क्योंकि गलती होने पर ट्रेडर्स पर पैनल्टी भी लगायी गई है। इससे भारी नुकसान की स्थिति आ चुकी है''। 

    सप्लाई चेन हुई चोक:

    स्वरन सिंह के अनुसार- भारत में कंप्यूटर बाजार में 90 फीसद से ज्यादा माल आयात होता है। ऐसे में अगर ट्रेडिंग में इतनी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा तो जाहिर सी बात है सप्लाई चेन पर इसका बुरा असर पड़ेगा। भविष्य में यह स्थिति ठीक न होने पर यह समस्या विकराल रूप ले सकती है। किसी भी माल को आयात करने के लिए टैक्स समझना बेहद आवश्यक है। सप्लाई चेन चोक होने के पीछे सबसे बड़ा कारण यही है की डिस्ट्रीब्यूटर से लेकर ट्रेडर तक किसी को जीएसटी पूरी तरह समझ नहीं आ रहा।

    कैसे मिलेगा इस समस्या से निजात?

    जीएसटी को लेकर मार्किट में आ रही परेशानी और इस असमंजस की स्थिति को रीडर्स को ठीक से समझाने के लिए हमने टैक्स प्रोफेशनल और ईसचिव के सीईओ मयंक वशिष्ट से बात की। ''सरकार द्वारा लाया गया जीएसटी का लॉ एकदम साफ है और इसी समझने में कोई दिक्कत नहीं है। मार्किट में जो भी स्थिति दिखाई जा रही है, वो गलत है। इसके पीछे सोशल मीडिया भी एक बड़ा कारण हैं जहां किसी भी जानकारी को फैला दिया जाता है और रीडर बिना तह तक जाए उन बातों को सच मान लेता है''। ट्रेडर्स द्वारा बताई गई परेशानियों के निवारण के सवाल में हमें यह उत्तर मिला।

    मयंक के अनुसार- कंप्यूटर और उसकी एक्सेसरीज पर पहले भी अलग-अलग टैक्स लगता था, तो ट्रेडर्स के लिए यह कोई नई स्थिति नहीं है। कुछ चीजों में बदलाव जरूर किए गए हैं- जैसे महंगे और सस्ते रेस्तरां में लगा अलग-अलग टैक्स, डेस्कटॉप के स्क्रीन साइज के हिसाब से अलग टैक्स आदि। लेकिन इसमें भी आम जनता का फायदा ही है, नुकसान नहीं।

    वन नेशन वन टैक्स को लेकर लोगों में गलत धारणा:

    वन नेशन वन टैक्स के सवाल के जवाब में मयंक ने बताया की लोगों में अब तक जीएसटी को लेकर कई प्रश्न हैं। सबसे पहले यह साफ करना जरुरी है की वन नेशन वन टैक्स का मतलब यह बिलकुल भी नहीं है की पूरे देश में हर प्रोडक्ट या एक्सेसरीज पर समान टैक्स लगेगा।

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    जीएसटी का अर्थ या वन नेशन वन टैक्स का अर्थ है की बिजनसेज सभी इनडायरेक्ट टैक्सेज को हटा कर अब एक टैक्स कर दिया गया है। उदहारण के लिए पहले एक्साइज, वैट , सर्विस, लग्जरी, एंटरटेनमेंट जैसे छोटे-बड़े कई टैक्स लगते थे। अब यह सब मिल कर एक टैक्स यानि जीएसटी हैं। यही है वन नेशन वन टैक्स और जीएसटी का सही अर्थ। इससे आम जनता, ट्रेडर, मैन्यूफैक्चर सभी को फायदा ही है। जीएसटी दलदल की तरह है इसके बारे में जितनी गलत अवधारणाएं रखेंगे यह उतना ही आपको समझ से बाहर लगेगा। इसमें कई नई चीजें भी हैं, जिसे समय के साथ-साथ ही समझा जा सकता है।

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