तीन साल में बदल गया ऑनलाइन सर्च करने का तरीका, 80 करोड़ लोगों का एडवाइजर बना AI टूल 'ChatGPT'
तीन सालों में जानकारी सर्च करने का तरीका बदल गया है। पारंपरिक सर्च इंजनों के सामने अब नई चुनौती आ गई है। AI चैटबॉट से वजह से लोगों की डिजिटल आदतें बदल गईं हैं। अब बातचीत के अंदाज में जानकारी पाना लोगों को पसंद आता है। ये चैटजीपीटी का प्रभाव है।
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ChatGPT की वजह से लोगों के ऑनलाइन सर्च करने का तरीका बदल गया है।
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। सूचना क्रांति युग में जेनरेटिव AI प्लेटफार्म 'ChatGPT' ने अपनी लॉन्चिंग के केवल तीन साल के अंदर किसी विषय पर जानकारी प्राप्त करने के तरीके में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है। केवल तीन साल के अंदर अमेरिकी कंपनी OpenAI का ये चैटबाट 80 करोड़ से ज्यादा लोगों का मित्र, सलाहकार और एक्सपर्ट बन चुका है।
क्या है ChatGPT?
ChatGPT एक AI चैटबाट है, जिसे OpenAI ने डेवलप किया है। ये इंसानों की तरह भाषा समझने और जवाब देने की क्षमता रखता है। इससे किसी भी विषय पर सवाल पूछ सकते हैं, जानकारी ले सकते हैं, लिखने में मदद पा सकते हैं या बातचीत कर सकते हैं।
अब लोगों के मन में कोई सवाल उठता है तो वे 'गूगल सर्च' पर जाने की बजाय 'चैटजीपीटी' पर पहुंचना अधिक पसंद करते हैं। मिसिसिपी स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और रिसर्च इंपैक्ट और AI स्ट्रेटेजी की निदेशक डेबोरा ली ने एक अध्ययन के आधार पर बताया कि जानकारी खोजने का यह तरीका तकनीक के उपयोग में एक गहरा बदलाव ला चुका है।
उन्होंने पाया कि चैटजीपीटी ने किसी दूसरे टूल को खत्म नहीं किया, बल्कि उन सबकी प्रासंगिकता को बनाए रखते हुए लोगों को व्यवस्थित क्रम में जानकारियां देना जारी रखा। 30 नवंबर 2022 को चैटजीपीटी की लॉन्चिंग के कुछ ही महीनों के अंदर हर हफ्ते करीब 10 करोड़ लोग चैटजीपीटी की मदद लेने लगे थे।

ये आंकड़ा 2025 के आखिर में बढ़कर 80 करोड़ जा पहुंचा है। गूगल के ट्रैफिक में गिरावट प्यू रिसर्च सेंटर के 2025 के अध्ययन में पाया गया कि 34% अमेरिकी चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो 2023 की तुलना में दोगुना है। 30 साल से कम आयु के 58% युवा AI से मदद ले रहे हैं। जेनरेटिव AI के बढ़ते प्रभुत्व का असर ये है कि गूगल का सर्च इंजन पिछड़ने लगा है।
गूगल के सर्च इंजन को बीते तीन वर्षों में ज्यादा अपडेट नहीं किया गया, क्योंकि कंपनी ने भी अपना पूरा ध्यान AI टूल जेमिनी पर केंद्रित किया हुआ है। सिमिलरवेब डेटा की रिपोर्ट के मुताबिक गूगल से समाचार वेबसाइट्स पर जाने का ट्रैफिक 2024 के मध्य के 2.3 अरब की तुलना में मई 2025 में गिरकर 1.7 अरब पहुंच गया है।
वहीं समाचार से संबंधित सर्च के मामले ट्रैफिक 56 प्रतिशत से बढ़कर सालभर में ही 69 प्रतिशत पर पहुंच गया। स्मार्ट स्पीकर और YouTube पर असर चैटजीपीटी आने के बाद से एलेक्सा और गूगल होम जैसे वायस असिस्टेंट की भी प्रासंगिकता कम हुई है। 2025 की वायस सर्च आंकड़ों के मुताबिक 12 साल से ऊपर के 34 प्रतिशत लोगों के पास स्मार्ट स्पीकर है, जबकि 2023 में ये संख्या 35 प्रतिशत थी।
इसके उलट, YouTube ही एकमात्र ऐसा टूल है, जो ChatGPT को कड़ी टक्कर दे रहा है। YouTube पर 2.74 अरब यूजर हैं। 90 प्रतिशत अमेरिकी किशोरों ने बताया है कि वे YouTube का इस्तेमाल करते हैं। लोग पहले ChatGPT से समझते हैं और अतिरिक्त जानकारी और प्रायोगिक समाधान के लिए YouTube का रुख करते हैं।

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