बाल भी बांका कर न पाएंगे हैकर्स, फोन की प्राइवेसी मेंटेन करने के लिए इन 10 बातों का रखें ध्यान
आजकल स्मार्टफोन्स से कई सारे काम आसानी से हो जाते हैं। अब फोन केवल कॉलिंग के काम नहीं आते। बल्कि ऑफिस का काम करना हो या बड़े-बड़े फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन करने हों। सब काम चुटकी में हो जाता है। लेकिन इसी वजह से फोन साइबर अपराधियों के टारगेट पर होता है। ऐसे में हम यहां आपको स्मार्टफोन प्राइवेसी को मेंटेन के लिए जरूरी टिप्स बताने जा रहे हैं।

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। स्मार्टफोन्स में बहुत सारी पर्सनल इन्फॉर्मेशन होती है। यही उन्हें हैकर्स और यहां तक कि एडवरटाइजर्स के लिए एक प्राइम टारगेट बनाती है। अपनी प्राइवेसी मेंटेन करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इससे न सिर्फ आप किसी भी बुरी नजर या जासूसी से बच सकेंगे। बल्कि आपको किसी तरह का फाइनेंशियल लॉस भी नहीं होगा।
स्ट्रांग ऑथेंटिकेशन यूज करें
अपने फोन को हमेशा एक स्ट्रॉन्ग पासवर्ड, पिन, या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन (फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन) से सिक्योर करें। सिंपल पैटर्न या आसानी से अनुमान लगाए जाने वाले पासवर्ड जैसे '1234' या 'पासवर्ड' से बचें। एडिशनल सिक्योरिटी के लिए, जरूरी अकाउंट्स के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) इनेबल करें।
अपने सॉफ्टवेयर को अपडेटेड रखें
आपके ऑपरेटिंग सिस्टम (iOS या एंड्रॉयड) और ऐप्स के रेगुलर अपडेट्स में सिक्योरिटी पैचेज शामिल होते हैं, जो वल्नरेबिलिटीज को ठीक करते हैं। ऐसे में ऑटोमैटिक अपडेट्स इनेबल करें कि ताकी आप हमेशा ऐप के लेटेस्ट और मोस्ट सिक्योर वर्जन पर रहें।
ऐप परमिशन्स को लिमिट करें
कई ऐप्स ऐसी परमिशन्स रिक्वेस्ट करते हैं जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती है। अपने फोन की प्राइवेसी सेटिंग्स चेक करें और अपने कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन, कॉन्टैक्ट्स और दूसरे सेंसिटिव डेटा के गैरजरूरी एक्सेस को डिसेबल करें। अगर कोई ऐप ज्यादा परमिशन मांगता है, तो किसी दूसरे ऐप के इस्तेमाल पर विचार करें।
पब्लिक Wi-Fi पर सावधान रहें
पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क अक्सर इनसिक्योर होते हैं और अटैक्स के लिए संवेदनशील होते हैं। पब्लिक नेटवर्क पर सेंसिटिव अकाउंट्स (जैसे, बैंकिंग या ईमेल) एक्सेस करने से बचें। ऐसा तब तक न करें जब तक वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल करके अपने इंटरनेट ट्रैफिक को एन्क्रिप्ट न कर लें।
जरूरत न होने पर ब्लूटूथ और लोकेशन को डिसेबल करें
ब्लूटूथ और लोकेशन सर्विसेज को इनेबल्ड छोड़ने से आप ट्रैकिंग और पोटेंशियल साइबरअटैक के कॉन्टैक्ट में आ सकते हैं। जब इस्तेमाल में न हों, तो उन्हें ऑफ कर दें, और केवल जरूरत पड़ने पर ही ऐप्स को अपने लोकेशन एक्सेस करने दें।
एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करें
स्टैंडर्ड टेक्स्ट मैसेज (SMS) एन्क्रिप्टेड नहीं होते हैं। अपनी बातचीत को बुरी नजरों से बचाने के लिए सिग्नल (Signal), वॉट्सऐप (WhatsApp) (एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन इनेबल्ड), या टेलीग्राम (Telegram) (सीक्रेट चैट मोड के साथ) जैसे सिक्योर मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करें।
अनवेरिफाइड ऐप्स और लिंक्स से बचें
ऐप्स केवल गूगल प्ले स्टोर या एपल ऐप स्टोर जैसे ट्रस्टेड सोर्सेज से ही डाउनलोड करें। फिशिंग अटैक्स और मालवेयर इंफेक्शन से बचने के लिए ईमेल, टेक्स्ट या मैसेज में सस्पिशियस लिंक्स पर क्लिक करने से बचें।
रिमोट वाइप और फाइंड माई डिवाइस इनेबल करें
एंड्रॉयड और iOS दोनों ही आपके फोन के गुम हो जाने या चोरी हो जाने पर उसे रिमोटली लोकेट, लॉक या इरेज करने के लिए 'फाइंड माई आईफोन' और 'फाइंड माई डिवाइस' जैसे टूल्स ऑफर करते हैं। ये सुनिश्चित करते हैं कि डिवाइस के कॉम्प्रोमाइज होने पर भी आपका डेटा सुरक्षित रहे।
प्राइवेसी-फोकस्ड ब्राउजर और सर्च इंजन का इस्तेमाल करें
गूगल क्रोम के बजाय, Brave या Firefox फोकस जैसे प्राइवेसी-फोकस्ड ब्राउजर का इस्तेमाल करने पर विचार कर सकते हैं। सर्च के लिए, DuckDuckGo का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री को ट्रैक नहीं करता है।
क्लाउड बैकअप को लेकर सावधान रहें
क्लाउड बैकअप सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन स्टोर कर सकते हैं। अगर आप उनका इस्तेमाल करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि ये एन्क्रिप्टेड हैं। अल्टरनेटिवली, आप बेहतर प्राइवेसी के लिए स्ट्रॉन्ग एन्क्रिप्शन के साथ लोकल बैकअप का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इन स्टेप्स को फॉलो करके, आप अपने स्मार्टफोन की प्राइवेसी को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं और अपने पर्सनल डेटा को खतरों से बचा सकते हैं।
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