नई दिल्ली(टेक डेस्क)। वैज्ञानिकों ने एक नई एल्गोरिथ्म का निर्माण किया है। इससे सोशल नेटवर्किंग साइट्स जैसे की फेसबुक और ट्विटर के फेक अकाउंट्स का पता लगाया जा सकेगा। यह प्रक्रिया इस कल्पना पर आधारित है की फेक अकाउंट्स नेटवर्क में मौजूद अन्य यूजर्स के लिए कुछ गलत लिंक्स बनाते हैं। ऐसा सोशल नेटवर्क एनालिसिस की स्टडी में कहा गया है।

इजराइल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर Dima के अनुसार- ''हाल ही में आए यूजर्स प्राइवेसी से जुड़े मामले में सोशल मीडिया का इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया गया। ऐसी परिस्थिति में फेक यूजर्स का पता लगाना सबसे महत्वपूर्ण है। हमने एल्गोरिथ्म को टेस्ट किया है और 10 अलग सोशल नेटवर्क्स पर रियल-वर्ल्ड डाटा सेट किया है। एल्गोरिथ्म ने इस पर सही परफॉर्म किया है।''

रिसर्चर्स के अनुसार- इस एल्गोरिथ्म से रियल-लाइफ दोस्ती और फेक यूजर्स को आसानी से डिटेक्ट किया जा सकता है। यह ट्विटर के लिए भी सामान रूप से कार्य करेगा।

क्या है फेसबुक डाटा चोरी का पूरा मामला? आपके मन में यह सवाल जरूर उठा होगा की आखिर इतने बड़े स्तर पर डाटा की चोरी कैसे हुई? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार डाटा को एक एनालिस्ट (विश्लेषक) की ओर से एकत्रित किया गया। फेसबुक के अनुसार- इस विश्लेषक की ओर से एक सर्वे दिया गया था, जिसे 270000 यूजर्स ने भरा है। यह सर्वे सिर्फ उन यूजर्स से ही नहीं बल्कि उनके दोस्तों आदि से भी भरवाया गया। इन यूजर्स को इस सर्वे से सम्बंधित कोई जानकारी नहीं थी। सर्वे के बाद ये सारी जानकारी कैम्ब्रिज एनलिटिका को दे दी गई जो की फेसबुक के नियमों के खिलाफ है। अब इस पर सवाल उठ रहे हैं की इस डाटा का आखिर क्या किया गया?

सोशल मीडिया पर डाटा रेगुलेशन की सख्त जरुरत: फेसबुक के फिलहाल 2.1 बिलियन यूजर्स एक्टिव हैं। इनमें से 1.4 बिलियन यूजर्स रोजाना साइट का इस्तेमाल करते हैं। सोशल नेटवर्किंग साईट होने के चलते इस पर लोग नियमित तौर पर अपने विचार, फोटोज और लाइफ इवेंट्स शेयर करते हैं। इससे फेसबुक के पास किसी भी कंपनी या व्यक्ति की हाई रिजोल्यूशन पिक्चर और जानकारी साझा हो जाती है। यह जानकारी लीक होने पर इसका कई बड़े स्तर पर गलत तरह से प्रयोग किया जा सकता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है की क्या आने वाले समय में प्राइवेसी प्रोटेक्शन और डाटा रेगुलेशन को लेकर कानून बनाए जाएंगे या नहीं? क्योंकि इस बड़े डाटा चोरी के मामले के बाद यूजर्स की निजी जानकारी की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कानूनों की सख्त जरुरत लगती है।

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Posted By: Sakshi Pandya