नई दिल्ली (टेक डेस्क)। पिछले कुछ महींनो से सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक विवादों में घिरी हुई है। सबसे पहला विवाद डाटा लीक का सामने आया था, जिसमें फेसबुक के करीब 8 करोड़ यूजर्स प्रभावित हुए थे। इसमें कैंब्रिज ऐनालिटिका नाम की कंपनी का नाम सामने आया था। इस डाटा लीक में भारत के भी करीब 5 लाख यूजर्स प्रभावित हुए थे। कैंब्रिज ऐनालिटिका पर पिछले साल अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को फायदा पहुंचाया गया था।

डाटा लीक के बाद राजनीतिक नोंक-झोंक

भारत में भी इस विवाद के बाद से राजनीतिक सरगर्मी देखने को मिली थी। केन्द्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दलों में इस विवाद के बाद नोंक-झोंक भी देखने को मिली थी। इसका सबसे बड़ा कारण कैम्ब्रिज ऐनालिटिका के ऑफिस में कांग्रेस पार्टी का पोस्टर होना था। सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने इस पर कांग्रेस की कड़ी आलोचना भी की थी। कांग्रेस ने भी केन्द्र सरकार पर सवाल खड़े किये थे।

केन्द्र सरकार ने जताई चिंता

हाल ही में अमेरिकी समाचार पत्रों में छपी खबर के मुताबिक फेसबुक ने माना कि उसने स्मार्टफोन बनाने वाली चीनी कंपनी हुवावे, ओप्पो आदि के साथ डाटा शेयर किया है। इसके बाद से एक बार फिर से सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट पर सवाल उठने फिर से शुरू हो गए हैं। फेसबुक ने स्वीकार किया कि उसने यूजर्स की जानकारियां, जिसमें निजी जानकारी, दोस्तों, रूचि आदि की जानकारी हुवावे से शेयर की है। मीडिया में इस रिपोर्ट के आने के बाद केन्द्र सरकार ने चिंता जताई है।

20 जून तक मांगा जबाब

केन्द्र सरकार ने कहा कि इस तरह से यूजर्स की जानकारियां थर्ड पार्टी से शेयर करने से फेसबुक की विश्वसनीयता पर एक बार फिर से सवाल खड़े हुए हैं। इस बात पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मिनिस्ट्री ने फेसबुक से 20 जून तक जबाब देने को कहा है। मंत्रालय ने फेसबुक से इसके लिए विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

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Posted By: Shridhar Mishra

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