यमुना छठ और स्कंद षष्ठी 2026: संतान सुख के लिए 24 मार्च को बन रहा है महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त
24 मार्च 2026 को यमुना छठ और स्कंद षष्ठी का पावन पर्व एक साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य से जानें संतान सुख, बेहतर स्वास्थ्य के लिए विशेष पूजन विधि।

यमुना छठ और स्कंद षष्ठी 2026 की शुभ तिथि (Image Source: AI-Generated)

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दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। चैत्र नवरात्रि का छठा दिन आध्यात्मिक रूप से अत्यंत ऊर्जावान माना जाता है। इस साल 24 मार्च 2026 को एक साथ दो पावन पर्व यमुना छठ और स्कंद षष्ठी मनाए जाएंगे। यमुना छठ को देवी यमुना के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है, वहीं स्कंद षष्ठी भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय (स्कंद) को समर्पित है।
ये दोनों ही पर्व संतान की उन्नति, परिवार की समृद्धि और रोगों से मुक्ति के लिए विशेष फलदायी माने जाते हैं। यदि आपके जीवन में संतान सुख या आरोग्य की प्राप्ति में बाधाओं की आशंका बनी रहती है, तो इन तिथियों पर किया गया पूजन आपके जीवन के सही संचालन में सहायक सिद्ध होगा।
यमुना छठ और स्कंद षष्ठी का शुभ समय
दृक पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का विशेष महत्व है। 24 मार्च 2026 को पूजन के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 PM से 12:53 तक रहेगा। यमुना छठ के अवसर पर सूर्योदय से पूर्व यमुना जी में स्नान करने का विधान है, जिससे आत्मा शुद्ध होती है।
वहीं स्कंद षष्ठी का व्रत रखने वाले भक्तों के लिए षष्ठी तिथि का समापन शाम 04:08 PM पर होगा। इस शुभ समय में की गई प्रार्थना घर में बरकत लाते हैं और मन की बड़ी इच्छाएं पूरी करने की शक्ति प्रदान करते हैं। सही मुहूर्त में किया गया ध्यान भविष्य की चिंताओं को दूर कर सहजता का संचार करता है।
संतान सुख और आरोग्य के लिए पूजन विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो यमुना जी के जल से आचमन करें, जो आरोग्य का वरदान देता है।
- भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और अपनी संतान की लंबी आयु व बुद्धि के लिए भगवान का शुक्रिया अदा करें।
- मां यमुना को नीले या पीले वस्त्र और फल अर्पित करें। स्कंद देव को मोर पंख और लाल फूल चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- भोग के रूप में नारियल या कंदमूल अर्पित करें, जिससे घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।
- इस दिन 'ओम स्कंदाय नमः' मंत्र का जाप करें, जो आपके भीतर के डर को समाप्त कर साहस और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
- पूजा के अंत में श्रद्धा के साथ क्षमा मांगें, जिससे व्यवसाय में उन्नति हो और पिता की संपत्ति का संरक्षण सुगम हो।
आरती का समय और भक्ति का महत्व
पूजा का समापन आरती के बिना अधूरा माना जाता है। सुबह के मुख्य पूजन के बाद और सूर्यास्त के समय मां यमुना और भगवान स्कंद की आरती करना अत्यंत लाभकारी है। आरती के दौरान पूरे परिवार का एकत्रित होना आपसी तालमेल को बेहतर बनाता है और घर के कलह को दूर करता है।
आरती के बाद अपनी बड़ी इच्छाएं भगवान के सामने रखें और उनसे जीवन के सही संचालन की प्रार्थना करें। सच्ची भक्ति और श्रद्धा के साथ की गई यह साधना भविष्य की बाधाओं को दूर करती है और व्यक्ति के भीतर अटूट शांति का संचार करती है। इससे समाज में मान-सम्मान और यश की वृद्धि होती है।
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लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।
