दीवाली की रात चौराहे पर क्यों रखा जाता है नींबू-मिर्च? भूलकर भी न करें यह गलती, पीछे पड़ सकता है बुरा साया
दीवाली की रात चौराहा क्यों नहीं लांघना चाहिए? क्या कहता है शास्त्र और क्या है धार्मिक मान्यता? जानिए चौराहे पर ...और पढ़ें

दीवाली की रात चौराहों पर पड़ी अनजान वस्तुओं को लांघने या छूने से बच। (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और मां लक्ष्मी के स्वागत का पर्व है। इस दिन लोग अपने घरों को दीपों से सजाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। लेकिन दिवाली की रात से जुड़ी कई सारी लोकमान्यताएं भी हैं, जिनको निभाने की रस्म आज भी कई घरों में पूरी की जाती है। इन्हीं में से एक मान्यता है कि दिवाली की रात किसी चौराहे को लांघना या वहां पड़ी अनजान वस्तुओं पर पैर रखना अशुभ होता है।
खासतौर पर आधी रात के समय चौराहे से गुजरने को लेकर लोगों को सावधानी बरतने के लिए भी कहा जाता है। इस विषय पर हमने उज्जैन के पंडित एंव ज्योतिषाचार्य मनीष शर्मा से बात की। वह कहते हैं, "दीवाली की रात कई लोग घर से बाहर अपनों से मिलने और उनका आशीर्वाद लेने जाते हैं, ऐसे में चौराहा लांघना और किसी अप्रिय वस्तु पर पैर पड़ जाने जैसी घटनाएं स्वभाविक हो सकती हैं।" आखिर इसके पीछे क्या धार्मिक और तांत्रिक मान्यता है? आइए जानते हैं।
चौराहे को दीवाली का रात लांघने को क्यों किया जाता है मना?
हिंदू धर्म में चौराहे का विशेष महत्व है। खासतौर पर वास्तु के हिसाब से यह बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। पंडित मनीष शर्मा कहते हैं, " चौराहा ऐसी जगह होती है, जहां चार दिशाओं से आने वाले रास्ते मिलते हैं। धार्मिक और तांत्रिक मान्यताओं में इसे अलग-अलग दिशाओं और शक्तियों के मिलन स्थल के रूप में देखा जाता है।"
वास्तु के अनुसार चौराहों पर बलि और कई तरह के विशेष धार्मिक अनुष्ठान करने की रस्म निभाई जाती हैं। यह सभी रस्में खासतौर पर व्यक्ति के ऊपर से बुरी बला टालने और बाधाओं से उसे बचाने के लिए की जाती हैं।
दिवाली की रात का क्या महत्व होता है?
वैसे तो हिंदू धर्म में सभी अमावस्याएं महत्वपूर्ण होती हैं, मगर कार्तिक की अमावस्या को बहुत विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह रात मां लक्ष्मी की पूजा, साधना और विशेष अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण होती है।
इस दिन तांत्रिक गतिविधिया और साधना चरम पर होती हैं। इस रात को मंत्र सिद्धि के लिए विशेष बताया गया है। इस दिन देखा गया है कि लोग अपनी परेशानियों और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए चौराहों पर विशेष सामग्री रखकर अनुष्ठान करते हैं। सी वजह से दिवाली की रात चौराहों पर रखी अनजान वस्तुओं को छूने या लांघने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा आपके भी जीवन में प्रवेश कर सकती है।
उज्जैन के पंडित एंव ज्योतिषाचार्य मनीष शर्मा
दीवाली की रात या अन्य विशेष तिथियों में कुछ चौराहों पर नींबू, मिर्च, सिंदूर, हल्दी, चावल, फूल, कपूर और सरसों जैसी चीजें दिखाई दे सकती हैं। इन सभी वस्तुओं को नजर दोष उतारने के लिए और बाधा निवारण और तंत्र-मंत्र से जुड़े अनुष्ठानों के लिए किया जाता है। यदि इन्हें लांघा जाए या फिर इन्हें स्पर्श किया जाए, तो जीवन में खराब असर देखने को मिल सकते हैं। पंडित मनीष शर्मा कहते हैं, " अनुष्ठान के बाद इन वस्तुओं को चौराहे पर छोड़ दिया जाता है। इसलिए इन्हें पैर से छूना या इनके ऊपर से गुजरना अशुभ माना जाता है।"
अत: दीवाली बहुत बड़ा पर्व है। इस दिन देवी लक्ष्मी घरों में भ्रमण करने आती हैं, इसलिए दीवाली की रात घर के दरवाजों को भी बंद नहीं किया जाता है, ऐसे में घरों से बाहर निकलना यानी घर को अकेला छोड़ा, अकेला घर देख देवी लक्ष्मी द्वार से ही लौट जाती हैं। इसलिए इस तरह की लोकमान्यताएं प्रचलित हैं।
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