दीवाली की रात मुख्य द्वार पर ही क्यों जलाते हैं दीपक? 99% लोग नहीं जानते इसके पीछे का ये बड़ा रहस्य!
दीवाली की रात मुख्य द्वार पर दीपक जलाना मां लक्ष्मी के स्वागत, नकारात्मक ऊर्जा से बचाव और वास्तु दोष निवारण ...और पढ़ें

दीवाली की रात दीपक जलाने का रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
मां लक्ष्मी के स्वागत और समृद्धि के लिए दीपक।
नकारात्मक ऊर्जा से बचाव और वास्तु दोष निवारण।
यमराज से रक्षा हेतु सरसों/तिल तेल का दीपक।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल देशभर में दीवाली का पर्व मनाया जाता है। दिवाली की रात को घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने का विधान है। इस दीपक को मां लक्ष्मी के स्वागत, नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकने और घर में सुख-समृद्धि के संचार का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में दहलीज को घर का सुरक्षा चक्र और ऊर्जा का मुख्य केंद्र माना गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीवाली की रात को घर के मुख्य द्वार पर दीपक क्यों जलाया जाता है? आइए इस आर्टिकल में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
मां लक्ष्मी और समृद्धि का स्वागत
घर के मुख्य द्वार से ही धन की देवी मां लक्ष्मी का आगमन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीवाली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। इसलिए दीवाली की रात घर में मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए दीपक जलाया जाता है। मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से शुभ परिणाम मिलते हैं।
नकारात्मक ऊर्जा से बचाव
ऐसा माना जाता है कि दीवाली की रात घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता है। साथ ही घर पर बुरी नजर नहीं लगती और दरिद्रता का वास नहीं होता है।
वास्तु दोष से छुटकारा
दीवाली की रात घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है और वास्तु दोष शांत होते हैं।
संकटों से रक्षा
दीवाली के दौरान दहलीज पर सरसों या तिल के तेल का दीपक रखना यमराज के प्रति सम्मान और अकाल मृत्यु व संकटों से परिवार की रक्षा की प्रार्थना का भी प्रतीक है।
इन बातों का रखें ध्यान
- घर के मुख्य द्वार पर तिल के तेल या सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
- दीपक को सीधे जमीन पर न रखें। उसके नीचे फूलों की पंखुड़ियां या चावल (अक्षत) जरूर रखें।
- मुख्य द्वार के दोनों ओर (दाएं और बाएं) एक-एक दीपक रखें।
- दीपक की लौ उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना सबसे शुभ फलदायी माना गया है।
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