दीवाली पर घर का एक भी कोना अंधेरे में क्यों नहीं छोड़ते? जानिए हर कमरे में दीया जलाने का गहरा रहस्य
दीवाली (Diwali 2026) पर घर के हर कोने में दीपक जलाने की परंपरा का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। यह नकारात्मक ...और पढ़ें

दिवाली पर घर के हर कोने में दीपक जलाने का महत्व (Picture Credits- AI Images)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। इस साल दीवाली का पर्व 8 नवंबर 2026, रविवार के दिन मनाया जाना है। इस खास मौके पर रात के समय जब पूरा घर दीपक की रोशनी में जगमगाता है, तो वह देखने में न सिर्फ सुंदर लगता है बल्कि उसके पीछे एक आध्यात्मिक महत्व भी छिपा है। दीवाली के मौके पर लोग अपने घरों के मुख्य द्वार से लेकर हर छोटे से बड़े कमरे में दीया जरूर जलाते हैं। सिर्फ कमरा ही नहीं बल्कि रसोई घर के मुख्य द्वार पर भी दोनों ओर दीया जलाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि, घर के प्रत्येक कोने को रोशन करने की यह परंपरा क्यों निभाई जाती है।
दरअसल ऐसा करना सिर्फ घरों को सजाना ही नहीं होता है, बल्कि घर के प्रत्येक हिस्सों को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करके मां लक्ष्मी के स्वागत और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का एक बेहतर तरीका माना जाता है। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी से जानते हैं दिवाली पर घर के हर कमरे में दीपक जलाने की मान्यता क्या है?
दिवाली पर घर के हर कमरे में दीपक जलाने की मान्यता
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या वर्ष की सबसे गहन और काली रात्रि मानी जाती है। शास्त्र और आध्यात्मिक नजरिए से दीपावली (Diwali 2026) के दिन घर के हर कोने में दीपक जलाने के पीछे कई महत्वपूर्ण धार्मिक और पौराणिक अर्थ निहित हैं। आइए जानते हैं इनसे जुड़ी प्रमुख बातें-
अमावस्या की रात और दीप जलाने के 3 प्रमुख अर्थ
अज्ञान पर ज्ञान की विजय- अमावस्या तिथि अंधकार और नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। दीपक की ज्योति अग्नि तत्व का स्वरूप है, जो अज्ञान, भय, दरिद्रता और नकारात्मक शक्तियों (अलक्ष्मी) का नाश करके घर में सात्विक ऊर्जा का संचार करती है।
श्री राम का अयोध्या आगमन- पौराणिक मान्यता के अनुसार, चौदह वर्ष के वनवास और रावण वध के पश्चात इसी पावन दिन भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी अयोध्या लौटे थे। उस अमावस्या की काली रात में अयोध्यावासियों ने संपूर्ण नगर को मिट्टी के दीपकों की पंक्तियों (दीप-अवली) से जगमग कर दिया था।
माता महालक्ष्मी का प्राकट्य- पद्म पुराण के अनुसार, कार्तिक अमावस्या के दिन ही क्षीरसागर से धन एवं समृद्धि की देवी माता महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। शास्त्रों में माता के स्वागत के लिए घर-घर में दीपक जलाने का विशेष विधान बताया गया है।
घर के हर कमरे और कोने में दीपक जलाने की मान्यता
स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार, दीपावली (Diwali 2026 की रात्रि लक्ष्मी पूजन के उपरांत घर के प्रत्येक भाग में दीपक रखना अनिवार्य माना गया है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-
अलक्ष्मी का निवारण
मान्यता है कि घर का कोई भी कोना यदि अंधकार में रहता है, तो वहां अलक्ष्मी यानी दरिद्रता, कलह और आलस्य का वास हो सकता है।
विभिन्न स्थानों पर दीपदान
रसोई, तिजोरी का स्थान, शयनकक्ष, तुलसी चौरा, जल का स्थान और छत तक दीपक रखने से घर का वास्तु दोष शांत होता है और समस्त नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर निकलती है।
पंचमहाभूतों का संतुलन
मिट्टी का दिया पृथ्वी तत्व, तेल जल तत्व, रुई की बाती वायु तत्व, अग्नि और उसकी ज्योति आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। घर के हर कोने में इसे प्रज्वलित करने से संपूर्ण वातावरण ऊर्जावान और पवित्र हो जाता है।
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