यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 08, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
धार्मिक अनुष्ठान, ग्रंथ बढ़ाते हैं व्यक्ति का ज्ञान
धर्म-कर्म - चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास यज्ञ के बाद प्रवचन का आयोजन - कथावाचक बोले भगवान

धर्म-कर्म
- चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास यज्ञ के बाद प्रवचन का आयोजन
- कथावाचक बोले, भगवान का नाम जपने से हो जाता व्यक्ति का उद्धार
जागरण संवाददाता, बरहनी (चंदौली) : चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास यज्ञ के बाद शुक्रवार को प्रवचन का आयोजन किया गया। कथावाचक सुंदरराज महाराज ने कहा कि व्यक्ति को धार्मिक कार्यक्रमों में अपना योगदान जरूर देना चाहिए। ऐसे कार्यों और धार्मिक ग्रंथों के पढ़ने से व्यक्ति का ज्ञान बढ़ता है। आज की भागमभाग जिदगी में हर छोटा-बड़ा व्यक्ति अशांत है, परेशान है। कई तरह की बीमारियों का शिकार हो रहा है। कारण, उसका मन न तो अपने कार्य में लग रहा न ही वह घर-परिवार में। ऐसे में भगवान की कथा, धार्मिक अनुष्ठान उसके भाग रहे मन को नियंत्रित करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से उनके मन में मानवता जागृत होती है। उसकी दिनचर्या, कार्य का निर्धारण नियत होने लगता है। बशतर्ें वह कुछ क्षण के लिए ग्रंथ पढ़े, कथा में समय दे। परमात्मा उसकी बुद्धि, विवेक में वृद्धि करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण कंस ने दिन और रात किया तो उसका भी उद्धार हुआ। इस कलयुग में तो सिर्फ भगवान के स्मरण से वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है जो संत महात्मा कठोर से कठोर तप कर के प्राप्त करते थे। बनावटी या दिखावा करने वाले भक्त को भी भगवान धर्म के रास्ते पर लाकर उसका कल्याण कर देते हैं। मृत्युंजय सिंह, शिवबच्चन सिंह, वीर प्रताप सिंह, आंचल पांडेय, वंदना सिंह आदि मौजूद थे।