विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Navratri Puja:क्यों की जाती है नवरात्र में सिर्फ नौ देवियों की पूजा? जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

Published: Thu, 15 Oct 2026 07:46 PM (IST)

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों यानी नवदुर्गा की पूजा का विशेष विधान है। देवी के अनेक स्वरूपों के ...और पढ़ें

नवरात्र में क्यों पूजी जाती हैं सिर्फ नौ देवियां?  (Picture Credit- AI Generated)

नवरात्र में क्यों पूजी जाती हैं सिर्फ नौ देवियां?  (Picture Credit- AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देवी शक्ति के अनेक स्वरूप हैं। कहीं 64 योगिनियों की पूजा होती है, तो कहीं 10 महाविद्याओं की आराधना की जाती है। इसके बावजूद नवरात्रि में मां दुर्गा के केवल नौ स्वरूपों यानी नवदुर्गा की पूजा का ही विधान है। आखिर इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है और नौ देवियों की आराधना को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? आइए, एस्‍ट्रोपत्री के ज्‍योतिष चंद्रेश शर्मा से जानते हैं ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर क्‍या है इसका महत्‍व।

ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, "हिंदू धर्म में मां दुर्गा को शक्ति, साहस और सृजन का प्रतीक माना जाता है। उनकी उपासना के अनेक तरीके हैं। शक्ति परंपरा में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें नवदुर्गा, 64 योगिनियां और 10 महाविद्याएं विशेष महत्व रखती हैं। हालांकि, नवदुर्गा की पूजा के पीछे देवी के नौ स्वरूपों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और आध्यात्मिक महत्व छुपा हुआ है।"

अंक 9 को माना जाता है पूर्णता का प्रतीक

अंक ज्योतिष में 9 को पूर्णता, ऊर्जा और समापन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी तरह, नवदुर्गा के नौ स्वरूपों को साधना की अलग-अलग अवस्थाओं से जोड़ा जाता है। मां शैलपुत्री से शुरू होकर मां सिद्धिदात्री तक की उपासना भक्त की आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक मानी जाती है।

चंद्रेश जी कहते हैं, " नवरात्र के नौ दिन साधक को आत्मचिंतन, संयम, भक्ति और सकारात्मकता की ओर बढ़ने का अवसर देते हैं। इसलिए इन नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की अलग-अलग विशेषताएं

नवरात्र में प्रतिदिन मां दुर्गा के एक विशेष स्वरूप की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी और तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना होती है। इसके बाद मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

चंद्रेश जी के अनुसार, प्रत्येक स्वरूप का अपना विशेष महत्व है। कोई साहस और तपस्या का प्रतीक है, तो कोई ज्ञान, मातृत्व, निर्भयता और सिद्धि का। इन नौ स्वरूपों की पूजा के माध्यम से भक्त देवी की विभिन्न शक्तियों का स्मरण करते हैं।

महिषासुर वध की कथा से जुड़ी है मान्यता

मां दुर्गा और महिषासुर की कथा नवरात्र के महत्व को और बढ़ा देती है। धार्मिक मान्यता है कि महिषासुर के अत्याचारों से परेशान देवताओं ने देवी शक्ति का आह्वान किया था। इसके बाद मां दुर्गा का अवतरण हुआ और उन्‍हों ने महिषासुर से युद्ध किया और उसका वध कर धर्म की स्थापना की।

यह भी पढ़ें- Navratri 2026: घर-घर पधारेंगी मां नवदुर्गा, पहले दिन शैलपुत्री की होगी पूजा; फिरोजाबाद में सज गए पंडाल

यह भी पढ़ें- Masik Durgashtami की पूजा में जरूर करें इस स्तोत्र का पाठ, कट जाएंगे सभी संकट

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।