विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Chhath Puja में सुहागिन के नाक से मांग तक सिंदूर भरने से क्‍या सच में लंबी हो जाती है पति की उम्र?

Published: Fri, 06 Nov 2026 03:01 PM (IST)

छठ पूजा में सुहागिनों द्वारा नाक से मांग तक लंबा सिंदूर लगाने का गहरा महत्व है। यह परंपरा पति की ...और पढ़ें

छठ पूजा में लंबा सिंदूर क्यों लगाती हैं सुहागिनें । (Picture Credit- AI Generated)

छठ पूजा में लंबा सिंदूर क्यों लगाती हैं सुहागिनें । (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य का प्रतीक।

  2. पति की तरक्की, मान-सम्मान और यश से जुड़ा।

  3. नकारात्मक ऊर्जा से बचाव और शुभता का विश्वास।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। छठ पूजा हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और कठिन व्रतों में से एक मानी जाती है। इस पर्व में महिलाएं संतान की सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और पति की लंबी आयु की कामना के लिए भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा करती हैं।

इस दौरान महिलाओं के सोलह श्रृंगार का भी विशेष महत्व होता है। इन्हीं में से एक है नाक से लेकर मांग तक लंबा पक्का सिंदूर लगाना। छठ पूजा के दौरान महिलाएं अपनी नाक से मांग तक सिंदूर की लंबी रेखा लगाती हैं। इसे सुहाग, अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का प्रतीक माना जाता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि छठ पूजा में सिंदूर लगाने की यह परंपरा क्यों इतनी खास मानी जाती है? इसके पीछे कई धार्मिक, पौराणिक और लोक मान्यताएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

पति की लंबी आयु का प्रतीक है लंबा सिंदूर

हिंदू धर्म में सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए मांग में सिंदूर भरती हैं। छठ पूजा के दौरान नाक से लेकर मांग तक लंबा सिंदूर लगाने की परंपरा भी इसी भावना से जुड़ी है।

धार्मिक मान्यता है कि सिंदूर की लंबी रेखा पति के प्रति प्रेम, समर्पण और अखंड सौभाग्य का प्रतीक होती है। ऐसा माना जाता है कि इस तरह सिंदूर लगाने से पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। 

पति की तरक्की और यश से भी जुड़ी है यह परंपरा

छठ पूजा में लंबा सिंदूर लगाने के पीछे एक मान्यता पति की उन्नति और सफलता से भी जुड़ी है। ऐसा माना जाता है कि नाक से मांग तक भरा हुआ सिंदूर पति के जीवन में तरक्की, मान-सम्मान और यश का प्रतीक होता है।

महिलाएं छठी मैया और सूर्य देव से प्रार्थना करती हैं कि उनके पति को जीवन में सफलता मिले और परिवार में हमेशा खुशहाली बनी रहे। इसी कामना के साथ वे पूरे श्रद्धाभाव से लंबा सिंदूर लगाती हैं।

माता सीता से जुड़ी है लंबा सिंदूर लगाने की मान्यता

पौराणिक और लोक मान्यताओं में माता सीता के सिंदूर लगाने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है। ऐसी मान्यता है कि माता सीता भगवान श्रीराम के प्रति अपने प्रेम और समर्पण के प्रतीक के रूप में मांग में सिंदूर लगाती थीं।

इसी धार्मिक भावना से जुड़कर विवाहित महिलाएं सिंदूर को अपने सुहाग और वैवाहिक सुख का प्रतीक मानती हैं। छठ पूजा जैसे पवित्र पर्व पर लंबा सिंदूर लगाना इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का एक तरीका माना जाता है।

द्रौपदी से जुड़ी है सिंदूर की एक लोककथा

लंबा सिंदूर लगाने को लेकर महाभारत काल से जुड़ी एक लोककथा भी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार, संकट के समय द्रौपदी ने जल्दी में सिंदूरदानी अपने सिर पर पलट ली थी, जिससे सिंदूर उनके माथे से लेकर नाक तक फैल गया था।

हालांकि, इस कथा का प्रामाणिक शास्त्रीय आधार स्पष्ट नहीं है, लेकिन लोकमान्यताओं में इसे सुहाग की रक्षा और पति के प्रति समर्पण से जोड़कर देखा जाता है।

नकारात्मक ऊर्जा से बचाव का भी है विश्वास

कुछ धार्मिक मान्यताओं में नाक से मांग तक लगाए जाने वाले लंबे सिंदूर को रक्षा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सिंदूर की यह रेखा परिवार को बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाने में सहायक होती है।

इसी कारण छठ पूजा के दौरान महिलाएं विशेष रूप से पक्का सिंदूर लगाती हैं। इसे परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है।

छठ पूजा में क्यों खास होता है पक्का सिंदूर?

छठ पूजा में पक्का सिंदूर लगाने की परंपरा केवल श्रृंगार तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं की आस्था, सुहाग और परिवार के प्रति उनकी मंगलकामना को दर्शाती है। इस दिन महिलाएं पूरी श्रद्धा और नियम के साथ छठी मैया और सूर्य देव की आराधना करती हैं।

अत: नाक से मांग तक लंबा सिंदूर लगाना छठ पर्व की एक विशेष लोकपरंपरा मानी जाती है। इसके माध्यम से महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, परिवार की खुशहाली और जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।

यह भी पढ़ें- नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक, छठ पूजा की पवित्रता बनाए रखने के लिए इन 6 गलतियों से हमेशा बचें

यह भी पढ़ें- छठ पूजा पर डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य क्यों दिया जाता है? परंपरा में छुपा है गहरा रहस्य


अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।