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यूपी में दशहरे पर क्यों देखी जाती है दही-मछली? जानिए लखनऊ-कानपुर की इस अनोखी परंपरा का धार्मिक महत्व

Published: Fri, 16 Oct 2026 06:32 PM (IST)

यूपी के लखनऊ, कानपुर, झांसी में दशहरे पर दही-मछली देखने की अनोखी परंपरा है। लोग विजयादशमी पर दही, मछली और ...और पढ़ें

दशहरे पर दही-मछली देखने से क्‍या होता है? (Picture Credit- AI Generated)

 दशहरे पर दही-मछली देखने से क्‍या होता है? (Picture Credit- AI Generated)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, झांसी और रामपुर जैसे शहरों में दशहरे के दिन दही-मछली देखने की परंपरा आज भी प्रचलित है। विजयादशमी के अवसर पर लोग इस रस्म को शुभ मानते हैं। कई परिवारों में दही, मछली और चांदी के सिक्के के दर्शन करके दिन की शुरुआत की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और पूरे साल कामकाज में सफलता मिलती है। चलिए इस परंपरा के धार्मिक महत्‍व का समझने की कोशिश करते हैं।

मछली को माना जाता है समृद्धि का प्रतीक

हिंदू धर्म में मछली का विशेष धार्मिक महत्व है। भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों में पहला अवतार मत्स्य अवतार ही है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके संसार की रक्षा की थी। इसी कारण मछली को जीवन की रक्षा, निरंतरता और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। दशहरे पर मछली देखने को लेकर माना जाता है कि इससे जीवन में खुशहाली आती है। कई लोग इसे व्यापार में तरक्की, धन-धान्य की वृद्धि और नए काम में सफलता का संकेत मानते हैं।

दही को क्यों माना जाता है शुभ?

भारतीय परंपरा में दही को शुभ माना जाता है। किसी यात्रा पर निकलने, परीक्षा देने या कोई नया काम शुरू करने से पहले दही खाने की प्रथा कई जगह देखने को मिलती है। इसे शुभ शुरुआत और अच्छे परिणामों की कामना से जोड़ा जाता है।

दही का संबंध पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से भी है। कई धार्मिक अवसरों पर भगवान को भी दही अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि इससे मन में सकारात्मकता आती है और नए काम के लिए उत्साह बढ़ता है।

चांदी के सिक्के का क्या है महत्व?

दही-मछली के साथ चांदी का सिक्का देखने की परंपरा भी कुछ स्‍थानों पर निभाई जाती है। हिंदू धर्म में चांदी को शुभ धातु माना गया है। इसका संबंध शुद्धता, संपन्नता और समृद्धि से होता है। दशहरे पर चांदी के सिक्के के दर्शन करना आर्थिक खुशहाली और परिवार की उन्नति की कामना का प्रतीक माना जाता है।

विजयादशमी से क्या है इस रस्म का संबंध?

दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व भगवान राम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की याद दिलाता है। इस दिन लोग नई शुरुआत करने और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेते हैं। ऐसे में दही मछली और चांदी का सिक्‍का देखने से उनका जीवन सकारात्‍मक ऊर्जा से भर जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।