भारत के इन इलाकों में दशहरा पर नहीं जलता रावण, दामाद और विद्वान मानकर होती है पूजा
विजयादशमी पर जहां देशभर में रावण दहन होता है, वहीं भारत में कुछ ऐसे स्थान भी हैं जहां रावण को ...और पढ़ें

वे स्थान जहां रावण की पूजा होती है।

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र के दसवें दिन यानी विजयादशमी के मौके पर देशभर में दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। इस साल दशहरा का उत्सव 20 अक्तूबर 2026, मंगलवार के दिन पड़ रहा है। देशभर के कई हिस्सों में इस दिन 'रावण दहन' यानी रावण का पुतला जलाया जाता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि दशहरा का उत्सव हर जगह एक जैसा नहीं होता है।
भारत में कुछ स्थानों पर रावण का पुतला जलाने के बजाय पूजा जाता है। सुनने में ये थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन कुछ परंपराओं में रावण के प्रति आदर और समर्पित भावना रखी जाती है। आइए जानते हैं भारत में रावण से जुड़े कुछ खास स्थानों के बारे में जहां रावण का पुतला जलाया नहीं जाता है। इन प्रथाओं से संबंधित कहानियां स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं।

(मंदसौर का रावण मंदिर)
मध्य प्रदेश का मंदसौर
भारत में रावण की पूजा करने के लिए मध्य प्रदेश का मंदसौर काफी प्रसिद्ध है। मंदसौर के खानपुरा इलाके में नामदेव समुदाय पारंपरिक तरीके से रावण को अपना दामाद मानते हैं, क्योंकि स्थानीय लोगों का मानना है कि रावण की धर्म पत्नी मंदोदरी का संबंध इसी क्षेत्र से था। यहां रावण का पुतला जलाना अपमान के रूप में देखा जाता है। दशहरा के मौके पर स्थानीय लोग रावण की याद करने के साथ एकत्रित होकर प्रार्थना करते हैं।
महाराष्ट्र का गढ़चिरौली
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में रहने वाले गोंड समुदाय के बीच भी रावण को सम्मानजनक रूप से याद किया जाता है। गोंड समुदाय से आने वाले लोग रावण को भी इसी संस्कृति का हिस्सा मानते थे। गढ़चिरौली में रहने वाले गोंड समुदाय के सदस्य दशहरा के मौके पर रावण का पुतला जलाने के बजाय पूजा और प्रार्थना पर विश्वास करते हैं।

(नोएडा का बिसरख रावण मंदिर)
उत्तर प्रदेश का बिसरख
उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्थित है बिसरख जो रावण से जुड़ा एक प्रसिद्ध स्थान है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इसी स्थान पर रावण का जन्म हुआ था। इस गांव का नाम बिसरख रावण के पिता ऋषि विश्वराव से जोड़कर देखा जाता है। इस गांव में दशहरा के मौके पर अलग ही तरह का नजारा देखने को मिलता है, जहां रावण का पुतला जलाने की बजाय प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

(विदिशा का रावणग्राम मंदिर)
मध्य प्रदेश का रावणग्राम
मध्य प्रदेश के विदिशा के पास स्थित रावणग्राम जहां दशहरा के अवसर पर अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। इस गांव में रावण को समर्पित एक मंदिर जहां उन्हें एक विद्वान व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है। दशहरा के साथ परिवार के खास अवसरों पर भी गांव में रावण की पूजा की जाती है। यहां रावण को पुतले के रूप में जलाना अपमान माना जाता है।
कर्नाटक का कोलार और मालवल्ली
कर्नाटक की कुछ परंपराओं में रावण की पूजा देखने को मिलती है। यहां रावण को शक्तिशाली व्यक्ति और शिव के परम भक्त के रूप में याद किया जाता है। हालांकि इस तरह की मान्यताएं कुछ खास समुदाय में ही देखने को मिलती है। यहां पर भी रावण का पुतला जलाने के बजाय रावण को याद करने पर जोर दिया जाता है।

(कानपुर का दशानन रावण)
कानपुर का दशानन मंदिर
उत्तर प्रदेश के कानपुर के शिवाला हिस्से में रावण का दशानन मंदिर है। इस मंदिर की मान्यता भी देशभर के अन्य मंदिरों से काफी अलग है। कानपुर का दशानन मंदिर साल में सिर्फ एक बार दशहरा के मौके पर खुलता है और स्थानीय लोग मंदिर की साफ-सफाई और पूजा पाठ करने के बाद फिर इसे बंद कर देते हैं।
रावण पूजा से जुड़े अन्य स्थान
जोधपुर
जोधपुर के मौदगिल में ब्राह्मण खुद को रावण का वंशज मानते हैं। वे लोग रावण दहन की बजाय उसकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते हैं।
उज्जैन
उज्जैन के चिकली गांव में भी रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है।
उत्तर प्रदेश का जसवंतनगर
उत्तर प्रदेश के जसवंतनगर में दशहरे के दिन रावण की आरती उतारी जाती है। उसकी मूर्ति के टुकड़े किए जाते हैं। इसके बाद उन टुकड़ों को लोग घर ले जाते हैं और रावण की तेरहवीं करते हैं।
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