Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Mahabharata Story: इस कौरव से लगाव रखते थे पांडव, मृत्यु पर फूट-फूटकर किया था विलाप

    Updated: Wed, 12 Feb 2025 12:49 PM (IST)

    महाभारत की कथा (Mahabharata Story) के अनुसार एक कुल का होने के बाद भी कौरव और पांडव की आपस में नहीं बनती थी। धृतराष्ट्र और गांधारी के 100 पुत्र थे जिसमें से एक ऐसा पुत्र भी था जिसका स्वभाव अन्य पुत्रों से बिल्कुल अलग था। अच्छे स्वभाव के कारण इस कौरव ने पांडवों से मन में भी एक खास जगह बना ली थी।

    Hero Image
    Mahabharat characters न्यायप्रिय और विवेकशील था यह कौरव।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महर्षि वेदव्यास के ग्रंथ महाभारत को काफी प्रसिद्धि मिली। इसमें कौरवों और पांडवों के बीच हुए युद्ध का वर्णन मिलता है। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे कौरव की, जिससे पांडव लगाव रखते थे। वह कौरव कोई और नहीं बल्कि विकर्ण (Pandavas attachment to Vikarna) था। साथ ही वह अकेला ऐसा कौरव था, जिसकी मृत्यु पर भीम को अत्यंत दुख हुआ था। चलिए जानते हैं इस  बारे में।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    इसलिए अगल था विर्कण

    दुराचारी दुर्योधन और दुस्सासन का भाई होने के बाद भी विकर्ण (Vikarna's role in Mahabharata) काफी न्यायप्रिय और विवेकशील व्यक्ति था। जब भरी सभा में भीष्म पितामह और आचार्य द्रौणाचार्य भी द्रौपदी चीरहरण का विरोध न कर सके, उस स्थिति में विकर्ण एक अकेला ऐसा कौरव था, जिसने द्रौपदी के चीरहरण का पुरजोर विरोध किया।

    इसी के साथ उसने दुर्योधन के कई गलत निर्णयों का भी विरोध किया था और उसे परिणामों के लिए चेताया भी था। विकर्ण एक महारथी था, जो युद्ध में अकेले लाखों सैनिकों पर भारी पड़ता था।    

    यह भी पढ़ें - Mahabharat Katha: दुर्योधन की जान बचाने के बदले अर्जुन ने मांगा ये वरदान, युद्ध में हासिल की जीत

    (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    विकर्ण और भीम का हुआ आमना-सामना

    विकर्ण जानता था कि कौरव अधर्म का साथ दे रहे हैं, लेकिन भाई होने के नाते उन्हें कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ना पड़ा। जब युद्ध भूमि में विकर्ण (Pandavas attachment to Vikarna) और भीमसेन का आमना-सामना हुआ तो, भीम, विकर्ण पर भारी पड़े।

    भीमसेन की जीत हुई और विकर्ण को अपने प्राणों से हाथ धोने पड़े, हालांकि भीम विकर्ण का वध नहीं करना चाहते थे। इस दौरान भीम को पहली बार किसी कौरव को मारने में इतना दुख और अफसोस हुआ था। अन्य पांडव भी विकर्ण की मौत पर बहुत दुखी हुए और विलाप करने लगे थे।

    यह भी पढ़ें - Mahabharat Yudh: महाभारत युद्ध के लिए बनाए गए थे ये नियम, इतनी बार हुआ उल्लंघन

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।