Lord Ram Life Story: इसलिए ली थी भगवान राम ने जल समाधि? रहस्यमयी है वजह
सनातन धर्म में भगवान राम की पूजा बेहद शुभ मानी गई है। कहा जाता है कि भगवान राम की पूजा-अर्चना करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जीवन में खुशहाली आती है। वहीं आज हम अपने इस आर्टिकल में भगवान राम की जल समाधि (Lord Ram Jala Samadhi Katha) को लेकर दो कथाओं का जिक्र करेंगे।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सरयू नदी में भगवान राम की जल समाधि को लेकर कई सारी कथाएं प्रचलित हैं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि जब सीता माता अपनी पवित्रता को सिद्ध करने के बाद धरती में समा गई थीं। इससे प्रभु राम बहुत ज्यादा दुखी हो गए थे। इसके बाद उन्होंने भी यमराज की सहमति से सरयू नदी के गुप्तार घाट में जल समाधि (Lord Ram Jala Samadhi Katha) ले ली थी।
दूसरी कथा (वाल्मीकि रामायण) के अनुसार, एक बार यमदेव संत का रूप धारण कर अयोध्या नगरी में पहुंचे, तो उन्होंने प्रभु श्री राम (Lord Ram Life Story) से कहा कि ''हमारे बीच कुछ गुप्त चर्चा होगी, जिसकी जानकारी किसी को नहीं होनी चाहिए''
साथ ही वे यह भी कहते हैं कि अगर कोई इसे सुनता है या उस दौरान कक्ष में आता है, तो उसे मृत्यु दंड मिलेगा। इसपर राम जी ने यमराज को वचन दे दिया और लक्ष्मण जी को उस कक्ष के बाहर द्वारपाल बनाकर खड़ा कर दिया।
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ऋषि दुर्वासा से जुड़ा है कनेक्शन
तभी ऋषि दुर्वासा वहां आते हैं और वे मर्यादा पुरुषोत्तम से मिलने की बात करते हैं। लक्ष्मण जी के बहुत समझाने पर भी वे नहीं मानते हैं और क्रोध में आकर भगवान राम को श्राप देने की बात कहते हैं। उनके इस क्रोध को देखकर लक्ष्मण जी अपने प्राणों की चिंता किए बिना ऋषि दुर्वासा को कक्ष में जाने की अनुमति दे देते हैं।
भगवान राम ने इसलिए ली थी जल समाधि (Jala Samadhi)
दुर्वासा ऋषि के जाते ही राम जी और यमराज की वार्ता भंग हो जाती है। साथ ही राम जी का वचन टूट जाता है। वचन टूटने से भगवान राम लक्ष्मण जी को राज्य से निष्कासित कर देते हैं। वहीं, लक्ष्मण जी भी अपने भाई राम का वचन पूरा करने के लिए सरयू नदी में जाकर जल समाधि ले लेते हैं। कहते हैं कि लक्ष्मण जी के इस वियोग प्रभु राम सह नहीं पाते हैं, इसके बाद वे भी जल समाधि लेने का निर्णय कर लेते हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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