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दीवाली की अगली सुबह बिहार में क्यों पीटा जाता है सूप? भोर के 4 बजे गूंजती है 'दरिद्र भगाने' की आवाज

Published: Tue, 03 Nov 2026 03:00 PM (IST)

बिहार में दीवाली पर एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें ब्रह्म मुहूर्त में सूप पीटकर 'दरिद्र भाग जा' कहा ...और पढ़ें

दिवाली पर सूप पीटने की परंपरा (Picture Credits- AI Images)

दिवाली पर सूप पीटने की परंपरा (Picture Credits- AI Images)

HighLights

  1. दीवाली पर बिहार में सूप पीटकर गरीबी भगाने की परंपरा।

  2. ब्रह्म मुहूर्त में 'दरिद्र भाग जा' कहकर नकारात्मकता दूर करते हैं।

  3. यह रिवाज सुख-समृद्धि आकर्षित करने का एक अनूठा तरीका है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दीवाली का त्योहार पूरे भारत वर्ष में अलग-अलग परंपरा और रिवाज के साथ मनाया जाता है। बिहार में भी दीवाली पर अलग तरह का नजारा देखने को मिलता है। सुबह 4 बजे जब न तो पूरी तरह अंधेरा रहता है और नहीं भोर की पहली किरण निकलती है, घर का एक बुजुर्ग सूप छानने वाली टोकरी पर मारता है और कहता है कि, 'दरिद्र भाग जा।' दीवाली पर होने वाली यह घटना कई लोग को अजीब लग सकती है, लेकिन बिहार के लोगों के लिए ऐसा करने के पीछे धार्मिक महत्व काफी गहरा है।

सूप पीटने की परंपरा सुबह-सुबह की जाती है, जिसे 'ब्रह्म मुहूर्त' के नाम से जाना जाता है। यह लक्ष्मी पूजा के ठीक बाद की जाती है, जिसे परिवार दीवाली की रात घर में खुशहाली लाने के लिए करते हैं। इसके पीछे का तर्क काफी सरल और सुंदर है, 'पहले सुख-समृद्धि को आकर्षित करो, फिर गरीबी को बाहर भेजो।' सूर्योदय से पहले का समय जब परिवार नए दिन की शुरुआत खुशहाली और समृद्धि के इरादे से करता है।

why bihar beats soop on diwali morning daridra bhagao tradition

सूप का इस्तेमाल क्यों होता है?

बिहार की संस्कृति में रसोई काफी महत्व रखती है। इसका इस्तेमाल गांव की प्रत्येक रसोई में अनाज को भूसी और छोटे-छोटे पत्थरों से अलग करने के लिए किया जाता है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, यह मेहनत और खाने का प्रतीक है। इसीलिए यह इस रस्म के लिए चुना गया है निशान बन गया है।

जब बड़े-बुदुर्ग इसे मारते हैं, तो वह कह रहे होते हैं, मेहनत और अनाज रहना चाहिए, जबकि भूख और कमी खत्म होनी चाहिए।

दीवाली के अगले दिन सुबह सूप पिटने की परंपरा का असल मकसद नेगेटिविटी को डराना और उससे दूर भगाना है। 'दरिद्र भाग जा' का मतलब है, 'गरीबी दूर हो जाओ।' पारंपरिक रूप से यह मंत्र सबसे बड़े सदस्य चलाते हैं, जिनकी आवाज में अनुभव और आशीर्वाद का वजन होता है। जब बच्चे इसे साल दर साल सुनते हैं, तो यह एक याद बन जाती है, जिसे वे जिंदगी भर अपने साथ रखते हैं।

why bihar beats soop on diwali morning daridra bhagao tradition (1)

सूप को जलाने का क्या मतलब?

पिटाई और मंत्रोच्चार करने के बाद सूप और डंडे को या तो गांव की सीमा के बाहर ही छोड़ दिया जाता है या फिर जला दिया जाता है। सूप को गांव के बाहर निकालने का असल मतलब गरीबी को घर के अंदर नहीं रखना है और उन्हें जलाना इसे हमेशा खत्म करने की निशानी है। हालांकि अलग-अलग स्थानों पर रीति-रिवाजों में अंतर देखने को मिल सकता है, लेकिन ऐसा करने के पीछे की भावना एक जैसी ही होती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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