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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 20, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आखिर क्यों भगवान विष्णु ने देवताओं की माता के गर्भ से जन्म लेने की जताई थी इच्छा, जानिए पौराणिक कथा

Published: Mon, 20 Jan 2025 01:08 PM (GMT+05:30)Updated: Mon, 20 Jan 2025 02:03 PM (GMT+05:30)

सूर्य देव इंद्र देव और वरुण देव की तरह ही हिंदू धर्म ग्रंथ में ऐसे कई देवताओं का वर्णन मिलता ...और पढ़ें

Dev Mata Aditi इस देवी ने दिया सभी देवताओं को जन्म (Picture Credit: Freepik)
Dev Mata Aditi इस देवी ने दिया सभी देवताओं को जन्म (Picture Credit: Freepik)

HighLights

  1. ऋषि कश्यप की पत्नी थीं देवी अदिति।
  2. अदिति ने दिया था सभी देवताओं को जन्म।
  3. विष्णु जी भी उनके मातृत्व से हुए थे प्रभावित।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कम ही लोगों ने देवी अदिति का नाम सुना होगा। उन्हें देवमाता भी कहा जाता है। अदिति का अर्थ है असीम। वेदों में खासकर ऋग्वेद में (Maa Aditi in Vedas) उनके बारे में अधिक जानकारी मिलती है। वरुण, मित्र, सूर्य, सोम, कामदेव, अग्नि और इंद्र जैसे कई देव उनके गर्भ से ही जन्मे हैं। चलिए उनके बारे में जानते हैं।

कौन हैं देवी अदिति (Dev Maa Aditi) 

ऋषि कश्यप की 17 पत्नियां थी, जिनमें से उनकी पहली पत्नी का नाम अदिति था। वह प्रजापति दक्ष और माता वीरणी की पुत्री थीं। वेदों और पुराणों में उन्हें देवमाता के रूप में वर्णित किया गया है, क्योंकि सभी देवता, जो पृथ्वी के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उन सभी का देवताओं जन्म अदिति (Aditi's significance) के गर्भ से ही हुआ है। उन्हें एक ब्रह्म शक्ति भी माना गया है।

(Picture Credit: Freepik)

कौन हैं 12 पुत्र

देवी अदिति और ऋषि कश्यप के पुत्रों को आदित्य कहा जाता है। आगे चलकर इनकी संतानों से ही अन्य देवी-देवताओं का जन्म हुआ। उनके 12 पुत्र इस प्रकार हैं -

  1. त्रिविक्रम (वामन भगवान)
  2. विवस्वान
  3. अर्यमा
  4. पूषा
  5. त्वष्टा
  6. सविता
  7. भग
  8. धाता
  9. वरुण
  10. मित्र
  11. विधाता
  12. इंद्र

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(Picture Credit: Freepik) (AI Image)

मातृत्व से प्रसन्न हुए थे भगवान

कथा के अनुसार, अदिति की भक्ति और मातृत्व से प्रसन्न होकर, एक बार भगवान विष्णु ने भी उनके पुत्र के रूप में जन्म लेने की इच्छा जताई। इसके बाद वह उनके गर्भ से वामन अवतार के रूप में जन्मे। इसी के साथ अदिति का पुत्र होने के कारण ही सूर्य देव को आदित्य के नाम से भी जाना जाता है।

जहां अदिति ने सभी देवताओं को जन्म दिया, वहीं उनकी बहन दिति के गर्भ से असुरों का जन्म हुआ। कहा जा है कि प्राचीन काल में देवी अदिति की पूजा का विधान था, लेकिन समय के साथ-साथ यह प्रचलन काफी कम होता गया।

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