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कौन हैं छठी मैया और भगवान सूर्य के साथ क्या है उनका नाता? इस अलौकिक रिश्ते के रहस्य को समझें

Published: Wed, 04 Nov 2026 01:30 PM (IST)

छठ पूजा में पूजी जाने वाली छठी मैया को बच्चों की रक्षक और सूर्य देव की बहन माना जाता है। ...और पढ़ें

छठी मैया और सूर्य देव का अलौकिक संबंध (Picture Credit: AI Generated)

छठी मैया और सूर्य देव का अलौकिक संबंध (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. छठी मैया बच्चों की रक्षक और षष्ठी देवी कहलाती हैं।

  2. सूर्य देव की बहन हैं छठी मैया, इसलिए पूजी जाती हैं।

  3. संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए होती है पूजा।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के सबसे मुख्य त्योहारों में से एक माना जाता है छठ पूजा का पर्व। चारों ओर छठी मइया के गीतों की गूंज होती है और माताएं अपनी संतान की दीर्घायु की कामना में 36 घंटे अन्न-जल ग्रहण किए बिना उपवास करती हैं। वास्तव में इस पर्व की धूम न सिर्फ बिहार में बल्कि देश के चारों कोनों में अलग ही दिखाई देती है।

इस दौरान सूर्य को अर्घ्य देना और नदी के बीच में खड़े होकर छठी मैया के साथ सूर्य देव की आराधना करना वास्तव में एक अलग ही एहसास होता है। आप सभी के मन में कभी न कभी यह ख्याल भी आता होगा कि आखिर कौन हैं छठी मइया और उनका सूर्य देव से क्या संबंध है।

छठी मैया की पूजा सूर्य देव के साथ की जाती है, क्योंकि छठ परंपरा में इन दोनों देवताओं को घर-परिवार में स्वास्थ्य, संतान और समृद्धि लाने वाला साथी माना जाता है। कार्तिक महीने में मनाया जाने वाला यह त्योहार छठी मैया और सूर्य के बीच के गहरे संबंध पर आधारित है। आइए आपको बताते हैं दोनों के बीच के अनोखे रिश्ते के बारे में।

कौन हैं छठी मैया?

छठी मैया, जिन्हें षष्ठी देवी भी कहा जाता है, बच्चों की माता और उनकी रक्षक मानी जाती हैं। 'षष्ठी' नाम संस्कृत के शब्द 'छह' से आया है। परंपरा के अनुसार, बच्चे के जन्म के छठे दिन उनकी पूजा की जाती है, क्योंकि वे नवजात शिशुओं और माताओं की रक्षक होती हैं।

छठ पूजा में, उनकी पूजा करने से संतान की सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है। छठी मैया पूरे परिवार की देखभाल करती हैं और उन्हें स्वास्थ्य, लंबी उम्र और वंश को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद देती हैं।

छठी माता और सूर्यदेव का संबंध

छठी माता सूर्य देव की बहन हैं इसी वजह से छठ पूजा के दौरान सूर्यदेव को अर्घ्य देकर उन्हें प्रसन्न किया जाता है। षष्ठी मां यानी छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली हैं। इस व्रत को करने से संतान को दीर्घायु का वरदान मिलता है। मार्कण्डेय पुराण में बताया गया है कि सृष्ट‍ि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया है।

इनके छठे अंश को मातृ देवी के रूप में पूजा जाता है और उन्हें ब्रह्मा जी की मानस पुत्री माना जाता है। छठी मइया को सम्मान देने के लिए कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को छठी माता की पूजा का विधान है।

छठी मैया की पौराणिक कथा क्या है?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी मालिनी को कोई संतान नहीं थी। उस समय उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप के कहने पर यज्ञ करवाया। कुछ समय बाद ही उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई, लेकिन वह मृत पैदा हुआ और इस वजह से राजा और रानी अत्यंत दुखी होकर विलाप करने लगे।

उसी समय वहां एक दिव्य देवी प्रकट हुईं जिनका नाम देवसेना था। उन्होंने बताया कि वो ब्रह्मा जी की मानस पुत्री हैं। उन्होंने मृत बच्चे को गोद में लिया और उसे जीवनदान दिया। उसी समय से छठी माता की पूजा संतान की दीर्घायु और सुरक्षा के लिए होने लगी।

छठी मैया को सूर्य देव की बहन होने के साथ और उर्वरता, शक्ति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की देवी भी माना जाता है। छठ पूजा के दौरान उनकी पूजा से संतान और पूरे परिवार की समृद्धि बनी रहती है और जीवन में खुशहाली आती है।

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