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Sharad Purnima पर मिट्टी, तांबे और पीतल में से किस कलश से चंद्रमा को अर्घ्य देना होता है शुभ? 

Published: Wed, 21 Oct 2026 07:27 PM (IST)

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है। मिट्टी, तांबे और पीतल के कलश का अपना ...और पढ़ें

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को कैसे दें अर्घ्य ? (Picture Credit- AI Generated)

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को कैसे दें अर्घ्य ? (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. मिट्टी का कलश पृथ्वी तत्व का प्रतीक, सादगी के लिए उत्तम।

  2. तांबे के कलश से चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ नहीं।

  3. पीतल का कलश शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त, अर्घ्य हेतु प्रयोग करें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। यही वजह है कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा करने और उन्हें अर्घ्य देने की रीति है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मन को शांति मिलती है। इस दिन कई लोग खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं और फिर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

हालांकि, पूजा के दौरान कई लोगों के मन में सवाल आता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए मिट्टी, तांबे या पीतल में से किस कलश का इस्तेमाल करना चाहिए? क्या किसी विशेष धातु के कलश से अर्घ्य देना अधिक शुभ माना जाता है? आइए, एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी बृज गौतम से जानते हैं कि इन तीनों कलश का क्या महत्व है और शरद पूर्णिमा पर इनका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।

शरद पूर्णिमा पर कलश का क्या है महत्व?

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी बृज गौतम के अनुसार, " कलश को पूर्णता, समृद्धि, जीवन और मंगल का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान कलश स्थापित करने की रीति है। कलश में जल भरकर उसे पूजा के लिए रखा जाता है। इसे शुभता और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है।"

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देते समय भी कलश का इस्तेमाल किया जा सकता है। कलश किस पदार्थ या धातु का होना चाहिए, इसका चुनाव उपलब्धता और सुविधा के अनुसार किया जा सकता है। आइए जानते हैं मिट्टी, तांबे और पीतल के कलश का धार्मिक महत्व।

मिट्टी के कलश से चंद्रमा को अर्घ्य देने का महत्व

मिट्टी का कलश पृथ्वी तत्व का प्रतीक माना जाता है। इसे सरल, सात्विक और प्राकृतिक माना जाता है। पूजा-पाठ में मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल प्राचीन समय से होता आया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मिट्टी का संबंध प्रकृति और धरती से है। शरद पूर्णिमा पर मिट्टी के कलश में स्वच्छ जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जा सकता है। यदि आप सादगी से पूजा करना चाहते हैं, तो मिट्टी का कलश एक अच्छा विकल्प है।

तांबे के कलश से चंद्रमा को अर्घ्य देने का महत्व

हिंदू धर्म में तांबे को पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण धातु माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में तांबे का संबंध सूर्य और अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है। इसे तेज, ऊर्जा और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि कई घरों में पूजा के दौरान तांबे के लोटे या कलश का इस्तेमाल किया जाता है। शरद पूर्णिमा पर तांबे के कलश से चंद्रमा को अर्घ्य न दें। आप इसकी जगह स्‍टील के के कलश या लोट का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

पीतल के कलश से चंद्रमा को अर्घ्य देने का महत्व

पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल भी हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। पीतल को शुभ कार्यों और पूजा-पाठ के लिए उपयुक्त माना जाता है। मंदिरों और घरों में पूजा के लिए पीतल के कलश, दीपक और अन्य बर्तनों का इस्तेमाल आम है। शरद पूर्णिमा पर पीतल के कलश में जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जा सकता है। ध्यान रखें कि पूजा में इस्तेमाल होने वाला कलश साफ होना चाहिए। अर्घ्य देते समय मन में चंद्र देव के प्रति श्रद्धा रखें और सुख-शांति की कामना करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।