विश्वकर्मा पूजा की आरती के बाद जरूर करें ये 3 काम, बिजनेस में मुनाफे के साथ बनी रहेगी सुख-समृद्धि
विश्वकर्मा पूजा के दिन अभिजीत मुहूर्त में उनकी आरती करने से सभी कष्ट दूर होते हैं, मन को शांति मिलती है और व्यापार में अपार सफलता प्राप्त होती है।

आज करें भगवान विश्वकर्मा की आरती (AI-Generated Image)
HighLights
भगवान विश्वकर्मा ब्रह्मांड के पहले इंजीनियर और वास्तुकार माने जाते हैं
रावण की लंका, द्वारका, इंद्रप्रस्थ जैसे नगरों का निर्माण इन्होंने किया
अभिजीत मुहूर्त में आरती से व्यापार में सफलता मिलती है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला इंजीनियर या वास्तुकार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं के अस्त्र-शस्त्र से लेकर उनके भव्य महल और सिंहासन बनाने का पूरा श्रेय विश्वकर्मा जी को ही जाता है। शायद कम लोग जानते हैं कि रावण की सोने की लंका, श्रीकृष्ण की सुंदर द्वारिका नगरी और पांडवों के लिए रहस्यमयी इंद्रप्रस्थ का निर्माण भी किसी और ने नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था।
यही वजह है कि आज के दौर में भी जो लोग कामकाजी हैं, फैक्ट्रियों में काम करते हैं या किसी भी तरह के निर्माण, व्यापार या तकनीकी कार्य से जुड़े हैं, वे अपने सुनहरे भविष्य और काम में सफलता के लिए विश्वकर्मा जी की पूजा पूरी श्रद्धा से करते हैं। इस दिन विशेष रूप से मशीनों, औजारों, कंप्यूटर और वाहनों की साफ-सफाई करके उनकी पूजा करने का विधान है।
आज के दिन करें ये आरती
आरती के बोल हमें याद दिलाते हैं कि भगवान विश्वकर्मा ने कैसे महर्षि अंगिरा को शांति प्रदान की थी और संकट में पड़े राजा के दुखों को पल भर में दूर कर दिया था। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति अभिजीत मुहूर्त में मशीनों की पूजा करने के बाद यह आरती गाता है, उसके मन की सारी दुविधाएं दूर हो जाती हैं। उसे अटल शांति मिलती है और व्यापार में सुख-संपत्ति का वास होता है।
भगवान विश्वकर्मा की आरती
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा ।। 1 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।। 2।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा । ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई ।। 3 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना ।। 4 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।। 5 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे ।। 6 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे ।। 7 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे ।।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।। 8 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
भगवान विश्वकर्मा जी की आरती करने की सही विधि
- सबसे पहले पूजा स्थान पर घी या तेल का दीपक और धूप-अगरबत्ती जलाकर आरती की शुरुआत करें।
- भगवान विश्वकर्मा को ताजे फूल, मौसमी फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
- सच्चे मन से आरती करते हुए भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें और उनका आवाहन करें।
- पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान विश्वकर्मा की आरती करें और आरती के पूरे बोल एक साथ मिलकर गाएं।
- आरती के दौरान या उससे पहले भगवान विश्वकर्मा को नारियल, पान के पत्ते, हल्दी और कुमकुम अर्पित करें।
- आरती पूरी होने के बाद, अपने सफल और समृद्ध जीवन की कामना करते हुए भगवान विश्वकर्मा जी से आशीर्वाद लें और भूल-चूक के लिए क्षमा मांगकर आरती का समापन करें।
आरती के बाद करें ये 3 काम
- फल और मिठाई का दान करें। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं होती।
- इस दिन वाहन, मशीन, दुकान और फैक्ट्री की पूजा करें। पूजा के दौरान हाथ में लाल कलावा बांधें।
- पूजा करते समय 'नमस्ते विश्वकर्माय, त्वमेव कर्तृता सदा, शिल्पं विधाय सर्वत्र, त्वं विश्वेशो नमो नमः' मंत्र का जप जरूर करें।
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