Vishwakarma Puja 2026: सोने की लंका से द्वारका तक, भगवान विश्वकर्मा ने बसाए थे ये 5 पौराणिक नगर
भगवान विश्वकर्मा को दिव्य वास्तुकार और शिल्पकार के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने सोने की लंका के साथ कई ...और पढ़ें

भगवान विश्वकर्मा की अद्भुत रचनाएं: सोने की लंका से द्वारका तक का सफर (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
भगवान विश्वकर्मा दिव्य वास्तुकार, शिल्पकार और ब्रह्मांड के निर्माता हैं।
सोने की लंका, इंद्रलोक जैसे भव्य महल विश्वकर्मा जी ने बनाए।
द्वारका नगरी, इंद्रप्रस्थ और जगन्नाथ मूर्ति भी उनकी अद्भुत रचनाएं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के समस्त देवी-देवताओं में से एक भगवान विश्वकर्मा को दिव्य वास्तुकार और शिल्पकार के रूप में पूजा जाता है। उन्हें ब्रह्मांड के दिव्य भगवानों का दर्जा प्राप्त है। वो मुख्य रूप से देवताओं के लिए महलों, दिव्य हथियारों और वाहनों के मुख्य निर्माता माने जाते हैं।
हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान विश्वकर्मा की भूमिका सिर्फ एक वास्तुकला और शिल्पकारी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने तकनीक की प्रगति में अपना बहुत बड़ा योगदान दिया है। उनके जन्म दिवस को विश्वकर्मा जयंती के रूप में हर साल मनाया जाता है।
विश्वकर्मा जी ने देवताओं के लिए जो महल बनाए उनमें से सबसे ज्यादा चर्चित सोने की लंका को माना जाता है और रामायण जैसे महान ग्रंथ में भी इसका बखान मिलता है, लेकिन लंका ही नहीं बल्कि उन्होंने और भी कई ऐसे निर्माण किए हैं जिन्हें देखकर आज भी दुनिया हैरान है। आइए आपको बताते हैं भगवान विश्वकर्मा की कुछ ऐसी ही पौराणिक रचनाओं के बारे में।
सोने की लंका
हम सभी जानते हैं कि लंका का राजा रावण था, लेकिन जब इसके निर्माण की बात आती है तब इसका निर्माण विश्वकर्मा जी ने ही किया था। शिव पुराण की पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के लिए एक बेहद खूबसूरत महल की जरूरत थी।
तब रावण के ही आग्रह पर भगवान विश्वकर्मा ने पूरे समुद्र के बीचों-बीच सोने की एक अद्भुत नगरी लंका का निर्माण किया। यह इतनी भव्य थी कि इसमें वास्तु शिल्प का एक बेजोड़नमूना दिखाई देता था, जो आज के बड़े से बड़े इंजीनियर को भी सोचने पर मजबूर कर देता है।
देवताओं का महल इंद्रलोक
देवताओं के राजा इंद्र का महल यानी इंद्रपुरी का निर्माण भी विश्वकर्मा जी ने ही किया था। स्वर्ग लोक और देवताओं की राजधानी अमरावती को भगवान विश्वकर्मा ने ही डिजाइन किया था।
वहां के उड़ने वाले रथ बिना खंभों के टिके हुए थे और विशाल महल और ऐसी तकनीक से बने थे, जो मौसम को भी कंट्रोल कर सकते थे। इन सभी का निर्माण विश्वकर्मा जी ने ही किया था। इसे ब्रह्मांड का सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता था।
श्री कृष्ण की द्वारका नगरी
श्री कृष्ण की द्वारका नगरी भी भगवान विश्वकर्मा का अद्भुत निर्माण था औरजब कंस के ससुर जरासंध ने मथुरा पर बार-बार हमला किया तो कृष्ण जी ने अपने वंश की रक्षा के लिए एक नई नगरी बसाने का फैसला किया।
उस समय उन्होंने भगवान विश्वकर्मा को याद किया और उन्होंने बीचों-बीच सोने और हीरों की बनी द्वारिका नगरी खड़ी कर दी।
महाभारत काल की इंद्रप्रस्थ नगरी
महाभारत काल में जब युधिष्ठिर के लिए एक नई नगरी का निर्माण करने की बात आई तो विश्वकर्मा जी ने इंद्रप्रस्थ का निर्माण किया। इसका सबसे बड़ा चमत्कार था वहां का राजसभा भवन।
इसे भ्रम की तकनीक से बनाया गया था। ये ऐसा महल था जिसमें व्यक्ति को दिखाई कुछ देता था और असल में होता कुछ और था। उस महल में जहां सूखा फर्श था वहां पानी दिखाई देता था और जहां पानी का तालाब था वहां सूखी जमीन दिखती थी। वास्तव में यह विश्वकर्मा ही का एक अद्भुत निर्माण ही था।
इसी तकनीक के भ्रम में आकर दुर्योधन जमीन समझकर पानी में गिर गया था और द्रोपदी ने उनका मजाक उड़ाया था, जिसके बाद महाभारत के युद्ध की नींव पड़ी।
जगन्नाथ पुरी का मूर्ति
स्कन्द पुराण और नारद पुराण में बताया गया है कि भगवान जगन्नाथ की मूर्ति का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। उस समय उन्होंने एक बूढ़े बढ़ई का रूप धारण किया और महल में एक शर्त रखी कि जब तक वो मूर्ति का निर्माण करेंगे वहां कोई भी आना नहीं चाहिए, लेकिन जब कमरे से कोई आवाज नहीं आई तो रानी के कहने पर राजा ने दरवाजा खोल दिया और भगवान विश्वकर्मा वहां से चले गए।
वास्तव में ये कुछ ऐसे निर्माण थे जिनके बारे में आज भी लोग चर्चा करते हैं और ये शिल्पकला का अद्भुत नमूना दिखाते हैं।
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