भगवान विश्वकर्मा ने एक रात में तैयार किया था 'गोला मठ मंदिर', सावन में भक्तों की पूजा के लिए लगती है कतार
मैहर में स्थित गोला मठ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन स्थल है, जिसके बारे में मान्यता है कि ...और पढ़ें

मैहर का गोला मठ मंदिर। (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
मैहर में स्थित प्राचीन गोला मठ मंदिर शिव को समर्पित।
भगवान विश्वकर्मा ने एक रात में मंदिर का निर्माण किया।
सावन में भक्तों की भारी भीड़, अनूठी वास्तुकला का केंद्र।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में स्थित गोला मठ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है। अपनी अनोखी वास्तुकला के साथ-साथ मंदिर एक पौराणिक मान्यता के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है। सावन के महीने में यहां शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। खासतौर पर सावन के सोमवार पर दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए इस मंदिर में पहुंचते हैं। चलिए इस मंदिर के बारे में विस्तार से जानते हैं।
भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी मान्यता
गोला मठ मंदिर के निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर एक बेहद रोचक मान्यता प्रचलित है, जिसका जिक्र मैहर जिले की ऑफीशियल वेबसाइट पर भी मिलता है। कहा जाता है कि देवताओं के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा ने इस मंदिर का निर्माण केवल एक रात में किया था। उन्होंने अपनी दिव्य शिल्पकला से रातोंरात मंदिर को तैयार कर दिया था।
पत्थरों से बनी अनूठी वास्तुकला
गोला मठ मंदिर की सबसे खास विशेषताओं में इसके पत्थरों पर मिलने वाली संरचनाएं हैं। मंदिर के पत्थरों को बहुत खूबसूरती से तराशा गया है। मंदिर की बनावट को देखकर किसी को भी इस बात पर विश्वास करना मुश्किल होगा कि इसे एक रात में बनाया गया है। स्थानीय मान्यता में यह भी कहा जाता है कि मंदिर के निर्माण में पत्थरों को इस तरह जोड़ा गया कि यह मंदिर दिखने में ही बहुत असाधारण प्रतीत होता है।
सावन में लगती है लंबी कतार
भगवान शिव को समर्पित होने के कारण सावन का महीना गोला मठ मंदिर के लिए विशेष महत्व रखता है। सावन के प्रत्येक सोमवार को बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचते हैं। श्रद्धालु कतारों में लगकर भगवान शिव के दर्शन करते हैं और शिवलिंग पर जल चढ़ाकर जलाभिषेक करते हैं।
गोला मठ का शिवलिंग
मंदिर के गृभग्रह में जो शिवलिंग स्थापित है, वह बहुत अधिक प्राचीन है और यह जिक्र कहीं नहीं मिलता है कि यह शिवलिंग अवतरित कैसे हुआ है। गृभग्रह के बाहर निकलते ही ठीक प्रवेश द्वार पर पत्थर के नंदी हैं, जिसकी मूर्ती भी बहुत प्राचीन दिखती है।
अत: आप अगर मैहर में रहते हैं या उसके आस पास के निवासी हैं, तो एक बार सावन में यहां के गोला मठ के दर्शन करने जरूर आएं।
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