Vishwakarma Puja 2026: क्या भगवान विश्वकर्मा ने बनाया था महादेव का त्रिशूल? साम्ब पुराण में है इसका वर्णन
क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव का त्रिशूल सूर्य देव के तेज से बना था? साम्ब पुराण और पौराणिक कथाओं के अनुसार, क्या है इस रहस्य की सच्चाई?

भगवान शिव के त्रिशूल का निर्माण कैसे हुआ? (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 17 सितंबर 2026 यानी आज हर कोई विश्वकर्मा जयंती मना रहा है। हिंदू धर्मशास्त्रों में भगवान शिव के त्रिशूल को केवल एक अस्त्र नहीं, बल्कि सृष्टि के तीनों लोकों और तीनों गुणों (सत्व, रज, तम) के संतुलन का प्रतीक माना गया है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि यह दिव्य अस्त्र आखिर किसने और कैसे बनाया? पौराणिक ग्रंथों, विशेषकर 'साम्ब पुराण' और 'विष्णु पुराण' में इसका बड़ा ही दिलचस्प और अलौकिक वर्णन मिलता है।
सूर्य के तेज और संज्ञा से जुड़ी पौराणिक कथा
विष्णु पुराण (तृतीय अंश, अध्याय 2) की कथा के अनुसार, देवताओं के परम शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पुत्री 'संज्ञा' का विवाह सूर्य देव से हुआ था। सूर्य देव का तेज इतना प्रचंड था कि संज्ञा उनकी गर्मी और चमक को ज्यादा दिनों तक सहन नहीं कर पाईं। इस समस्या से परेशान होकर वह अपने पिता विश्वकर्मा के पास पहुंचीं और सबकुछ बताया।
अपनी पुत्री का दुख दूर करने के लिए देवशिल्पी विश्वकर्मा ने एक अनूठा उपाय निकाला। उन्होंने सूर्य देव की सहमति से उन्हें अपने तक्षण यंत्र (शाण चक्र) पर चढ़ाया और उनके प्रचंड तेज का कुछ हिस्सा तराशकर छांट दिया, जिससे सूर्य देव का रूप सहने योग्य हो गया।
वहीं, साम्ब पुराण के 14वें अध्याय के 23वें श्लोक में भी इस घटना का बहुत ही सुंदर और प्रामाणिक वर्णन किया गया है। श्लोक के अनुसार-
शूलशक्तिगदाचक्रशरासनपरश्वधान्।
दैवतेभ्यो ददौ कृत्वा विश्वकर्मा महामतिः।।
इसका सीधा-सा मतलब है कि देवशिल्पी विश्वकर्मा ने सूर्य के उसी छांटे गए दिव्य तेज से भगवान शिव के लिए दिव्य त्रिशूल, कार्तिकेय के लिए अमोघ शक्ति (भाला), भगवान विष्णु के लिए सुदर्शन चक्र और गदा, अन्य देवताओं के लिए धनुष और फरसे (परशु) जैसे भयंकर अस्त्रों का निर्माण किया और फिर उन्हें देवताओं को सौंप दिया।
यह श्लोक इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि महादेव का त्रिशूल और देवताओं के अन्य अजेय अस्त्र सूर्य की ऊर्जा और विश्वकर्मा जी के अद्भुत शिल्प का ही नतीजा हैं।
साम्ब पुराण की यह कथा बताती है कि देवशिल्पी विश्वकर्मा ने न केवल ब्रह्मांड के महान नगरों की रचना की, बल्कि देवताओं के सबसे शक्तिशाली अस्त्रों को भी अपने शिल्प कौशल से गढ़ा था।
यह भी पढ़ें- विश्वकर्मा पूजा 2026: आज के दिन मशीनों पर क्यों बनाया जाता है स्वस्तिक? पढ़ें औजारों की पूजा का खास महत्व
यह भी पढ़ें- Vishwakarma Puja 2026: सोने की लंका से द्वारका तक, भगवान विश्वकर्मा ने बसाए ये 5 पौराणिक नगर
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
