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विश्वकर्मा पूजा पर सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का महासंयोग, पंडित जी ने बताया औजारों की पूजा का शुभ मुहूर्त

Published: Thu, 17 Sep 2026 07:30 AM (IST)

भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग के शुभ संयोग में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाएगी। इस ...और पढ़ें

सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग के साथ देव शिल्पी विश्वकर्मा की पूजा (AI Generated Image)

सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग के साथ देव शिल्पी विश्वकर्मा की पूजा (AI Generated Image)

HighLights

  1. भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग में पूजा।

  2. कल-कारखानों, गैराज में मशीनों और उपकरणों की होगी पूजा।

  3. देव शिल्पी विश्वकर्मा देवताओं के वास्तुकार और निर्माण-कला के अधिष्ठाता।

जागरण संवाददाता, पटना। सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग के पुण्यकारी संयोग में भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर गुरुवार को देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा होगी। कल-कारखानों, गैराज, कंपनियों, हार्डवेयर प्रतिष्ठानों, मोटर वाहन व साइकिल दुकानों सहित निर्माण और शिल्प से जुड़े संस्थानों में मशीनों और उपकरणों की सफाई कर विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी।

भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा को प्रतिष्ठित कर पूजन होगा ज्योतिष आचार्य पंडित राघव नाथ झा ने बताया कि सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के साथ कन्या संक्रांति होती है। पूजन के लिए सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक दोपहर 11:51 बजे से 12:40 बजे तक अभिजीत मुहूर्त बना रहेगा।

पंडित राकेश झा ने बताया कि 17 सितंबर की देर रात 11:31 बजे सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। गुरुवार रात 8:41 बजे तक अनुराधा नक्षत्र और इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा।

रात 8:41 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का संयोग भी रहेगा। इस अवसर पर पंचदेव, श्रीहरि विष्णु, कलश-गणेश, नवग्रह, भगवती और महादेव का पूजन भी किया जाएगा।

निर्माण और शिल्प के देवता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा देवताओं के वास्तुकार और निर्माण-कला के अधिष्ठाता हैं। कलाकार, बुनकर, शिल्पकार, इंजीनियर, कारीगर और व्यापारी वर्ग के लिए यह पूजा विशेष महत्व रखती है। धार्मिक परंपराओं में देवताओं के भवन, नगर और अस्त्र-शस्त्र के निर्माण से भी उन्हें जोड़ा गया है।

जगन्नाथ मंदिर की स्थापत्य परंपरा को भी विश्वकर्मा के शिल्प कौशल से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि विश्वकर्मा पूजा केवल मशीन और औजारों की आराधना तक सीमित नहीं, बल्कि श्रम, सृजन और निर्माण-कौशल के सम्मान का पर्व भी मानी जाती है।

पूजन का शुभ मुहूर्त:

  • सर्वार्थ सिद्धि व रवियोग: रात्रि 08:41 बजे तक
  • शुभ योग मुहूर्त: प्रातः 05:37 बजे से 07:09 बजे तक
  • चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: सुबह 10:12 बजे से 02:47 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:19 बजे से 12:08 बजे तक