विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 18, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Tulsi Vastu Tips: अनजाने में भी न करें तुलसी के पौधे से जुड़ी ये गलतियां, वरना जीवन भर रहेंगे परेशान

By Vaishnavi DwivediEdited By: Vaishnavi Dwivedi
Published: Mon, 18 Dec 2023 03:05 PM (IST)

Tulsi Vastu Tips तुलसी के पौधे को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना गया है। ऐसे में अगर मां तुलसी ...और पढ़ें

Tulsi Vastu Tips: तुलसी पूजन का महत्व
Tulsi Vastu Tips: तुलसी पूजन का महत्व

HighLights

  1. तुलसी के पौधे को सनातन धर्म में लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है।
  2. तुलसी का पौधा सदैव हरा-भरा रहना चाहिए।
  3. तुलसी के पौधे का सूखना एक अशुभ संकेत माना गया है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Tulsi Vastu Tips: तुलसी के पौधे को सनातन धर्म में लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। ऐसा कहा जाता है, यदि मां तुलसी की पूजा नियम अनुसार नहीं की जाए, तो जीवन में कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में अगर आप अपने घर में सुख-समृद्धि का वास चाहते हैं, तो वास्‍तु शास्‍त्र में दिए गए उन नियम को जरूर जान लें, ताकि अनजाने में भी आपसे कोई गलती न हो सके, तो आइए जानते हैं-

यह भी पढ़ें: Hanuman Ji Names: शनि की साढ़े साती से पाना चाहते हैं निजात, तो जरूर करें हनुमान जी के 108 नामों का मंत्र जाप

तुलसी के पौधे से जुड़े नियम

वास्‍तु शास्‍त्र में कहा गया है कि घर में लगा हुआ तुलसी का पौधा सदैव हरा-भरा रहना चाहिए। क्योंकि तुलसी के पौधे को धन-वैभव का प्रतीक माना गया है। इसलिए यह हमेशा हर-भरा ही रहना चाहिए।

वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार, तुलसी के पौधे का सूखना एक अशुभ संकेत माना गया है। सूखा तुलसी का पौधा आर्थिक मुश्किलों की ओर इशारा करता है। इसलिए अपने घर के तुलसी के पौधे का ख्याल अच्छे से रखना चाहिए।

अगर आपके घर का तुलसी का पौधा सूख चुका है, तो उसे किसी गंदे या अपवित्र स्थान पर न रखें, इससे आपकी मुश्किलें बढ़ सकती है। वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार, सूखे तुलसी के पौधे को किसी नदी में प्रवाहित करना चाहिए।

वास्‍तु शास्‍त्र कहता है कि तुलसी के पौधे के आसपास गंदगी नहीं होनी चाहिए। साथ ही घर के जिस स्थान पर तुलसी का पौधा लगा है, उसे सदैव साफ रखना चाहिए। ताकि मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहे।

तुलसी मंगलाष्टक मंत्र

ॐ श्री मत्पंकजविष्टरो हरिहरौ, वायुमर्हेन्द्रोऽनलः

चन्द्रो भास्कर वित्तपाल वरुण, प्रताधिपादिग्रहाः

प्रद्यम्नो नलकूबरौ सुरगजः, चिन्तामणिः कौस्तुभः

स्वामी शक्तिधरश्च लांगलधरः, कुवर्न्तु वो मंगलम्

यह भी पढ़ें: Masik Durgashtami 2023: मासिक दुर्गाष्टमी पर करें दुर्गा चालीसा का पाठ, घर में खुशियों का होगा आगमन

डिसक्लेमर- इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/जयोतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेंगी।