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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 17, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गोपियों के प्रेम के सामने अपना सारा ज्ञान भूल गए थे उद्धव, सफल हुआ कृष्ण जी का उद्देश्य

Published: Tue, 17 Jun 2025 01:56 PM (IST)

हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कई कथाएं मिलती हैं। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रची गईं लीलाएं भी मन ...और पढ़ें

गोपियों ने सिखाया उद्धव को प्रेम का सही अर्थ।
गोपियों ने सिखाया उद्धव को प्रेम का सही अर्थ।

HighLights

  1. भगवान श्रीकृष्ण के मित्र और भक्त थे उद्धव जी।
  2. गोपियों को ज्ञान का उपदेश देने गए थे बृजधाम।
  3. गोपियों ने उद्धव को समझाया प्रेम का असली अर्थ।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उद्धव को भगवान श्रीकृष्ण के मित्र और भक्त के रूप में जाना जाता है। उद्धव जी बहुत ज्ञानी थे, इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को समझाने के लिए उन्हें बृज भेजा था।

अंत में गोपियां भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी प्रेम और भक्ति से उद्धव को ही मोहित कर लेती हैं। गोपियों और उद्धव का प्रसंग आज भी लोगों को प्रेरणा देता है। चलिए जानते हैं इस बारे में।

इसलिए उद्धव को भेजा

गोपियां भगवान श्रीकृष्ण को दिन-रात याद करती थीं। भगवान श्रीकृष्ण जानते थे कि अगर वह वापस जाएंगे, तो गोपियां और राधा जी, उन्हें कभी मथुरा नहीं लौटने देंगी। तब उन्होंने उद्धव को गोपियों को ज्ञान और वैराग्य का उपदेश देने के लिए  बृज भेजा।

साथ ही भगवान श्रीकृष्ण उद्धव को भी प्रेम का असली अर्थ समझाना चाहते थे, जो उन्हें गोपियों के पास जाकर ही मिल सकता था। उद्धव को लगा कि वह भोली-भाली गोपियों को आसानी से समझा लेंगे।

उद्धव ने समझाई ये बातें

जब उद्धव वृंदावन पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि गोपियां भगवान श्री कृष्ण के वियोग में दुखी हैं। उन्होंने गोपियों को ज्ञान, योग और निर्गुण ब्रह्म का उपदेश देना शुरू किया। उन्होंने कहा कि भगवान किसी एक जगह नहीं हैं, बल्कि निराकार रूप में सभी जगहों पर बसे हुए हैं।

तब भी गोपियों की आंख से आंसू बहती रहीं और उन्होंने उद्धव से कहा कि कृष्ण जी के बिना उनके लिए ज्ञान और वैराग्य का कोई काम नहीं है। हमें केवल उनका दर्शन ही चाहिए। गोपियां यह कहते हुए उद्धव द्वारा बताई गईं बातों को स्वीकार करने से मना कर देती हैं।

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गोपियों ने कहीं ये बातें

गोपियां उद्धव को “बड़भागी” कहकर व्यंग्य करती हैं, क्योंकि वह भगवान श्रीकृष्ण के साथ रहने के बाद भी उनके प्रेम का सही से अनुभव न कर सके। गोपियों के भगवान के प्रति इस अटूट भक्ति और प्रेम को देखकर उद्धव अपना सारा ज्ञान भूल जाते हैं और भूल भावों से भर जाते हैं। अंत में उद्धव गोपियों को प्रणाम करते हुए मथुरा लौटते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।