Shardiya Navratri: आज से शुरू हो रही हैं नवरात्र, महिषासुर वध से विजयादशमी तक की कथा पढ़ें
शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो रही हैं, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। जानें महिषासुर वध ...और पढ़ें
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महिषासुर वध की कथा और विजयादशमी का महत्व । (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
नवरात्र मां दुर्गा को समर्पित, बुराई पर अच्छाई की जीत।
मां दुर्गा ने अहंकारी असुर महिषासुर का वध किया।
विजयादशमी महिषासुर पर देवी की विजय का पर्व।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र का पावन पर्व नौ रातों तक मनाया जाता है और यह शक्ति की देवी मां दुर्गा को समर्पित है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि से जुड़ी प्रमुख पौराणिक कथाओं में महिषासुर वध की कथा सबसे महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं और तीनों लोकों को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था।
यह कथा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है और धर्म की शक्ति अंततः विजयी होती है।
महिषासुर वध की कहानी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर एक अत्यंत शक्तिशाली और अहंकारी असुर था। उसने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न किया और उनसे ऐसा वरदान प्राप्त किया, जिसके अनुसार किसी देवता, दानव या मनुष्य के हाथों उसकी मृत्यु नहीं हो सकती थी। वरदान प्राप्त करने के बाद उसका अहंकार और बढ़ गया। उसने तीनों लोकों-स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल-में अपना आतंक फैलाना शुरू कर दिया।
महिषासुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया और उनके अधिकार छीन लिए। उसके अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे और उनसे सहायता की गुहार लगाई।
देवताओं की स्थिति देखकर त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु और महेश-तथा अन्य देवताओं ने अपनी-अपनी दैवीय शक्तियों को एकत्र किया। इन शक्तियों से एक महाशक्ति का प्राकट्य हुआ, जिसे देवी दुर्गा के रूप में जाना गया।
देवी दुर्गा को देवताओं ने विभिन्न अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। भगवान शिव ने उन्हें त्रिशूल, भगवान विष्णु ने चक्र और अन्य देवताओं ने गदा, धनुष-बाण, तलवार आदि शस्त्र दिए। सिंह को उनका वाहन बनाया गया।
जब देवी दुर्गा ने हुंकार भरी तो पूरा ब्रह्मांड गूंज उठा। महिषासुर ने जब देवी को देखा तो वह क्रोधित हो गया और अपनी विशाल सेना के साथ उनसे युद्ध करने के लिए निकल पड़ा। देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ। महिषासुर अपनी मायावी शक्तियों के बल पर कभी भैंसे, कभी सिंह और कभी हाथी का रूप धारण कर देवी को भ्रमित करने का प्रयास करता रहा। हालांकि, देवी दुर्गा ने अपने दिव्य अस्त्रों और अदम्य शक्ति से उसके हर प्रयास को विफल कर दिया।
अंततः जब महिषासुर ने भैंसे का रूप धारण किया, तब देवी दुर्गा ने अपने त्रिशूल से उस पर प्रहार कर उसका वध कर दिया। महिषासुर के वध के साथ ही देवताओं को उसके अत्याचार से मुक्ति मिली। इसी विजय को अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
विजयादशमी से संबंध
नवरात्रि के नौ दिनों के बाद दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह वही दिन है जब देवी दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इसलिए विजयादशमी को शक्ति और धर्म की विजय का पर्व माना जाता है।
नवरात्रि की यह पौराणिक कथा हमें संदेश देती है कि बुराई और अधर्म चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दें, सत्य और धर्म की शक्ति के सामने उनका अंत निश्चित है।
स्रोत
पौराणिक कथा-संदर्भ: मार्कंडेय पुराण के देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) तथा प्रचलित हिंदू धार्मिक परंपराएं।
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