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शारदीय नवरात्र में कन्याओं को क्या खिलाएं और क्या दें उपहार? महाअष्टमी-नवमी के लिए नोट करें ये जरूरी बातें

Published: Sat, 17 Oct 2026 03:00 PM (IST)

शारदीय नवरात्र में महाअष्टमी और महानवमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इसमें कन्याओं को भोजन कराने के साथ ...और पढ़ें

कन्या पूजन से जुड़ी खास बातें (Picture Credit- AI Generated)

कन्या पूजन से जुड़ी खास बातें (Picture Credit- AI Generated)


HighLights

  1. कन्या पूजन से मां दुर्गा की कृपा और सुख-शांति मिलती है।

  2. कन्याओं को चुनरी, श्रृंगार, बर्तन, पढ़ाई का सामान उपहार में दें।

  3. हलवा, पूरी, चने, खीर, फल कन्या पूजन में खिलाना शुभ है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) के पावन पर्व में महाअष्टमी और महानवमी की तिथियों का विशेष महत्व है। इन तिथियों पर कन्या पूजन (Kanya Pujan 2026) करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है। साथ ही शारदीय नवरात्र व्रत का पूर्ण फल मिलता है।


इसमें नौ कन्याओं और एक बालक को भोजन कराया जाता है, जिसे बटुक भैरव का स्वरूप माना जाता है। कन्या पूजन में भोजन करवाने के साथ उपहार और दक्षिणा देने का भी विधान है। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि कन्याओं को क्या दें, जिससे वे प्रसन्न होकर जाएं। आइए इस आर्टिकल में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

कन्याओं को क्या उपहार दें?

कन्या पूजन के दिन कन्याओं को उपहार में लाल चुनरी और शृंगार का सामान दे सकते हैं। इसके अलावा स्टील के छोटे बर्तन देना भी शुभ माना जाता है। पढ़ाई से जुड़ी चीजें जैसे पेन, पेंसिल बॉक्स, रंग आदि भी दिए जा सकते हैं। माता सरस्वती की कृपा प्राप्ति के लिए इसे शुभ माना जाता है। कन्या पूजन के अंत में कन्याओं को दक्षिणा जरूर दें।

कन्याओं को क्या खिलाएं?

कन्या पूजन के दिन कन्याओं को सूजी या आटे का हलवा, पूरी और काले चने की सब्जी खिलाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा खीर, फल और मिठाई खिलाना भी उत्तम माना जाता है।

कन्या पूजन में कितनी कन्याएं होनी चाहिए?

महाष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन में 9 कन्याओं का होना सबसे शुभ माना जाता है। 9 कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, एक बालक को भी कन्या पूजन में अवश्य शामिल करना चाहिए।

महाअष्टमी 2026 डेट और टाइम (Mahashtami 2026 Date and Time)

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत- 18 अक्टूबर को सुबह 08 बजकर 27 मिनट पर
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का समापन- 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, उदया तिथि के अनुसार, 18 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

महानवमी 2026 डेट और टाइम (Mahanavami 2026 Date and Time)

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत- 19 अक्टूबर को सुबह 10बजकर 51 मिनट पर

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का समापन- 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, महानवमी 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में नवमी का कन्या पूजन 19 अक्टूबर को किया जाएगा। वहीं, अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को सुबह 08 बजकर 27 मिनट पर होगी। ऐसे में 18 अक्टूबर को तिथि के शुरू होने के बाद कन्या पूजन के बाद किया जा सकता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।