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Kanya Pujan 2026: कन्या पूजन में 'लंगूर' का होना क्यों है जरूरी? इसके बिना अधूरी मानी जाती है पूजा

Published: Thu, 26 Mar 2026 01:00 PM (IST)

नवरात्र के कन्या पूजन में एक छोटे बालक यानी 'लंगूर' को बिठाने की परंपरा सदियों पुरानी है। पढ़ें इसके पीछे का धार्मिक महत्व।

Kanya Pujan 2026: कन्या पूजन 2026 (Image Source: AI-Generated)

Kanya Pujan 2026: कन्या पूजन 2026 (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेक्स, नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) के अष्टमी और नवमी के दिन घरों में नन्हीं कन्याओं को माता का रूप मानकर पूजा जाता है। उन्हें हलवा-पूरी खिलाया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। लेकिन, क्या आपने गौर किया है कि कन्याओं के बीच में एक छोटे से बालक को भी बिठाया जाता है, जिसे प्यार से 'लंगूर' कहा जाता है?

इसके पीछे गहरा धार्मिक रहस्य छिपा है। दरअसल, माता रानी के इस पूजन में बालक का होना उतना ही जरूरी है जितना कन्याओं का।

बटुक भैरव और हनुमान जी का प्रतीक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां शक्ति (देवी) होती हैं, वहां उनकी रक्षा के लिए भैरव बाबा भी हमेशा विराजमान होते हैं। कन्या पूजन में बैठने वाले बालक को 'बटुक भैरव' का रूप माना जाता है। कुछ परंपराओं में इसे वीर हनुमान का प्रतीक भी माना जाता है। जैसे हनुमान जी हमेशा माता सीता की रक्षा में तत्पर रहते थे, वैसे ही भैरव को माता का रक्षक माना गया है।

Kanya pujan 2026

(Image Source: AI-Generated)

पूजा क्यों रह जाती है अधूरी?

पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि भगवान शिव (Lord Shiva) ने ही भैरव को देवी के सभी शक्तिपीठों की रक्षा का दायित्व सौंपा था। इसलिए, जब हम नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं, तो उनके साथ एक बालक को भोजन कराना अनिवार्य होता है। माना जाता है कि बिना भैरव (बालक) की पूजा के, माता रानी अपना भोग पूरी तरह स्वीकार नहीं करतीं। यह पूजा की संपूर्णता का प्रतीक है।

इसका उल्लेख मुख्य रूप से 'देवी भागवत पुराण' में मिलता है, जहां शक्ति की उपासना के साथ भैरव के महत्व को भी विस्तार से बताया गया है। इसके अलावा, 'अग्नि पुराण' में भी कुमारी पूजन के साथ 'बटुक' (बालक) के पूजन का विधान स्पष्ट रूप से वर्णित है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।