शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों संग क्यों रचाया महारास? वजह है बेहद खास
शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान कृष्ण ने ...और पढ़ें
-1792732018563_m.webp)
बहुत ही खास है शरद पूर्णिमा की रात (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्त्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर (Kab Hai Sharad Purnima 2026) को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी का आगमन पृथ्वी पर होता है। यह दिन देवी लक्ष्मी, भगवान कृष्ण और चंद्रमा की विशेष पूजा के लिए अत्यंत खास माना जाता है।
द्वापर युग में शरद पूर्णिमा की रात को ही भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने महारास के लिए शरद पूर्णिमा की रात को ही क्यों चुना? अगर नहीं, तो आइए इस लेख में हम आपको इसके पीछे की वजह बताते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भगवान कृष्ण के द्वारा महारास के लिए शरद पूर्णिमा की रात को चुनने के पीछे मुख्य रूप से पौराणिक और आध्यात्मिक कारण जुड़े हुए हैं।
चंद्रमा की 16 कलाएं और अमृत वर्षा
केवल शरद पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा अपनी पूरी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है। इन किरणों की वजह से वातावरण बेहद शीतल, अलौकिक और दिव्य बन जाता है। साथ ही मन और शरीर भी पवित्र होता है।
महादेव ने धारण किया था गोपी का रूप
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने महारास के लिए देवी पार्वती को भी निमंत्रण भेजा था। इस महारास में जाने के लिए मां पार्वती ने महादेव से आज्ञा मांगी, तो महारास में शामिल होने के लिए महादेव भी तैयार हो गए। जब वे वृंदावन पहुंचे, तो उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि महारास में कृष्ण के अलावा कोई और पुरुष शामिल नहीं हो सकता। इसलिए महादेव ने महारास में शामिल होने के लिए गोपी का रूप धारण किया।
गोपियों के साथ किया महारास
शरद पूर्णिमा की रात को श्री कृष्ण ने वंशीवट में गोपियों के साथ महारास किया था। उस समय उनकी बांसुरी की धुन इतनी मधुर थी कि सिर्फ धरती के प्राणी ही नहीं, बल्कि स्वर्ग के देवता भी उस अद्भुत रास को देखने के लिए आतुर हो गए थे।
यह भी पढ़ें- Sharad Purnima 2026: चंद्रमा की अमृतमयी आभा में नहाएगी शरद पूर्णिमा की रात, मिथिला में मनेगा कोजगरा
यह भी पढ़ें- Sharad Purnima पर मिट्टी, तांबे और पीतल में से किस कलश से चंद्रमा को अर्घ्य देना होता है शुभ?
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
